नेपाली पीड़ित के परिजनों को नहीं मिला मुआवजा
काठमांडू, 23 जून (आईएएनएस)। पुणे की जर्मन बेकरी विस्फोट की घटना के चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन घटना में मारे गए एक नेपाली कर्मचारी के परिजनों को भारतीय अधिकारियों द्वारा घोषित मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है।
नवाकोट जिले का निवासी गोकुल नेपाली (22) जर्मन बेकरी में काम करता था। 13 फरवरी को हुए विस्फोट में उसकी मौत हो गई थी। इस विस्फोट में चार अन्य विदेशी नागरिक भी मारे गए थे।
विस्फोट में कुल 17 लोग मारे गए थे, जबकि दो अन्य नेपाली सहित लगभग पांच दर्जन लोग घायल हो गए थे।
पुणे प्रशासन ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 500,000 रुपये मुआवजे की घोषणा की थी।
गोकुल की मां मिथु और पत्नी मैना मुआवजे की राशि प्राप्त करने पुणे गए थे। लेकिन नौकरशाहों की लाल फीताशाही के कारण वे खाली हाथ लौट गए।
नेपाल की सरकारी मीडिया ने बुधवार को खबर प्रकाशित की है कि दोनों महिलाओं को काठमांडू लौटने के लिए कहा गया और कहा गया कि मुआवजे की राशि वहीं भारतीय दूतावास के जरिए उपलब्ध करा दी जाएगी। दोनों महिलाएं मुआवजे के लिए राजधानी काठमांडू में कई हफ्ते डेरा डाले रहीं, लेकिन उन्हें मुआवजे की राशि नहीं मिल पाई।
उन्हें मुआवजा तो नहीं मिला, अलबत्ता उनकी मुश्किल और बढ़ गई। पुणे और काठमांडू की यात्रा के कारण उन पर 40,000 रुपये का कर्ज चढ़ गया है। दुनिया के एक सबसे गरीब देश, नेपाल के गांवों में यह राशि काफी बड़ी मानी जाती है।
परिवार में कोई दूसरा सदस्य कमाने वाला नहीं है। मौत के चंद दिनों पहले ही गोकुल की शादी हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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