नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सेना की वर्दी में थे सुरक्षाबल
पश्चिम मिदनापुर के पुलिस उपाधीक्षक (ऑपरेशन) अनीश सरकार ने आईएएनएस के साथ बातचीत में हालांकि स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों ने जो वर्दी पहनी थी उससे सेना का कोई संबंध नहीं है और यह बाजार से खरीदा गया था।
सरकार ने कहा कि बाजार में इस तरह की वर्दी भरपूर मात्रा में मौजूद है।
उल्लेखनीय है कि संयुक्त सुरक्षा बलों ने रांझा वन क्षेत्र के दुली गांव में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की जिसमें आठ नक्सली मारे गए। इस दौरान सुरक्षा बलों ने सेना की वर्दी पहनी थी।
इसकी वजह से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई कि क्या नक्सलियों से लड़ने के लिए सेना को तैनात किया गया है। नक्सल समर्थक ग्रामीणों, जनजातीय संस्थान और बुद्धिजीवियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।
पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारण समिति (पीसीएपीए) के प्रवक्ता मनोज महतो ने बिना कैबिनेट में चर्चा किए सेना की तैनाती के लिए राज्य और केंद्र सरकार की आलोचना की है।
अनीश सरकार के स्पष्टीकरण के बाद ही इस मामले में भ्रम की स्थिति दूर हुई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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