राज्यसभा चुनाव : नहीं हुआ उलट-फेर, जेठमलानी और माल्या जीते (राउंडअप)
राजस्थान से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार राम जेठमलानी तो कर्नाटक से निर्दलीय उम्मीदवार विजय माल्या अपना-अपना चुनाव जीत गए। लोक जनशाक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान भी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे हैं।
राजस्थान में राज्यसभा की चार सीटों के लिए हुए मतदान में कांग्रेस के आनंद शर्मा और अश्क अली टाक, भाजपा के राम जेठमलानी और वी. पी. सिंह को सफलता मिली जबकि कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी संतोष बागड़ोदिया कोई उलट-फेर करने में असफल रहे।
200 सदस्यीय राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 102 और भाजपा के 79 सदस्य हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सदस्यों द्वारा चुनाव से दूर रहने की घोषणा के साथ जेठमलानी के राज्यसभा पहुंचने की राह आसान हो गई। भाजपा को दोनों सीटें जीतने के लिए 80 मतों की आवश्यकता थी और उसने इसे प्राप्त कर लिया। जनता दल युनाइटेड के विधायक फतेह सिंह और एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार ने भाजपा को समर्थन किया।
बिहार में पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में बाजी पासवान और भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रवक्ता रूडी के अलावा जनता दल (युनाइटेड) के आर. सी. पी. सिंह और उपेंद्र कुशवाहा तथा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के रामकृपाल यादव के हाथ लगी। पासवान को 39, रूडी को 47, सिंह को 47, कुशवाहा को 48 और यादव को 38 मत मिले। निर्दलीय उम्मीदवार बी. जी. उदय को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक उन्हें दो ही मत मिले।
यहां चुनाव में नौ विधायकों ने क्रास वोटिंग की। इनमें से भाजपा का एक, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पांच और राजद के दो विधायक हैं। इन विधायकों ने राजद और जद (यू) के पक्ष में मतदान किया। भाजपा के बनवारी राम और बसपा की सीता सुंदरी ने क्रास वोटिंग करना स्वीकार किया है।
कर्नाटक में प्रसिद्ध उद्योगपति विजय माल्या, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ऑस्कर फर्नाडीस राज्यसभा चुनाव जीतने में सफल रहे।
निर्दलीय उम्मीदवार विजय माल्या पर सबकी निगाहें टिकी थे। इसके बावजूद वह शुरू से ही अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिख रहे थे और अंतत: उसे साबित भी कर दिखाया। वह इससे पहले 2002 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।
इन तीनों के अलावा भाजपा के अयानूर मंजूनाथ ने भी जीत दर्ज की। एकमात्र असफल उम्मीदवार रहे कांग्रेस के टी. वी. मारूती। चौथी सीट के लिए उनके और माल्या के बीच मुकाबला था।
माल्या को जनता दल (सेक्यूलर) के 27, एक निर्दलीय और भाजपा के दूसरी वरीयता के मत प्राप्त हुए। कांग्रेस की हार सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ने माल्या का समर्थन किया।
झारखण्ड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में बाजी कांग्रेस और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के हाथ लगी। कांग्रेस के उम्मीदवार धीरज साहू ने 28 और झामुमो के के. डी. सिंह ने 32 मत प्राप्त कर चुनावी सफलता अर्जित की।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अजय मारू को चुनाव में असफलता हाथ लगी। वह सिर्फ 17 मत ही जुटा सके।
सिंह को झामुमो के 18 मतों के अलावा ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ-साथ निर्दलीय विधायकों को समर्थन मिला। जबकि कांग्रेस के धीरज साहू को झारखण्ड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) का समर्थन मिला।
पांच राज्यों में राज्यसभा की 18 सीटों के लिए गुरुवार सुबह नौ बजे से आरंभ हुआ मतदान संपन्न हुआ था और शाम से ही नतीजे आने आरंभ हो गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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