गैस त्रासदी : भाजपा ने उठाए राजीव की भूमिका पर सवाल (राउंडअप)

बहरहाल, इस मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पुनर्गठित मंत्री समूह (जीओएम) ने साफ किया है वह गैस हादसे से संबंधित हर आयामों पर अपनी बैठक में चर्चा करेगा। शुक्रवार को इस समिति की पहली बैठक होनी है। प्रधानमंत्री ने 10 दिनों के भीतर समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

एंडरसन की भारत से सुरक्षित निकासी के मसले पर भाजपा ने गुरुवार को आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने जानबूझकर और इच्छा से एंडरसन को देश से बाहर भगाया।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "एंडरसन को बाहर भगाना सुनिश्चित करने के लिए षडयंत्र रचा गया था।" उन्होंने कांग्रेस पर जानबूझकर एंडरसन को देश से बाहर सुरक्षित निकालने का आरोप लगाया।

उल्लेखनीय है कि पूर्व अमेरिकी राजनयिक गॉर्डन स्ट्रीब ने आईएएनएस से बातचीत में पिछले दिनों खुलासा किया था कि भारत सरकार ने अपने किए वादे को पूरा करने के लिए एंडरसन को सुरक्षित अमेरिका भेजा था।

उन्होंने कहा, "इससे स्पष्ट है कि उस वक्त जो कदम उठाया गया था वह भारत सरकार द्वारा उठाया गया था जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे। उस वक्त एक समझौता हुआ था और मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने इसका क्रियान्वयन किया था। इसलिए ऐसा व्यक्ति जो 15000 लोगों की हत्या का आरोपी है, उसे विशेष विमान से भोपाल से दिल्ली लाया गया।"

कांग्रेस पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए प्रसाद ने कहा, "एंडरसन को दिल्ली या जबलपुर में कहीं भी रखा जा सकता था। ऐसे कई सबूत हैं कि तत्कालीन सरकार ने जानबूझकर एंडरसन को बाहर भगाने में मदद की।"

ज्ञात हो कि एंडरसन को दिसम्बर 1984 में गिरफ्तार किया गया था और थोड़ी देर बाद ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया था। बाद में सरकार ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। एंडरसन फिलहाल सेवानिवृत्त है और अमेरिका में रह रहा है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में इस मसले पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा, "इसे लेकर कांग्रेस पर उठ रहे गंभीर सवालों को देखते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए और चर्चा की जानी चाहिए।"

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार में प्रवक्ता रहे राजनयिक जी. पार्थसारथी ने आईएएनएस से कहा है कि एंडरसन को बाहर भेजने का फैसला 'सोच-समझकर' लिया गया था और सरकार के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था।

उन्होंने कहा, "एंडरसन ने सहायता करने के लिए भारत आने का प्रस्ताव किया था और उसने अमेरिकी दूतावास के माध्यम से भारत सरकार से संपर्क साधा। यदि उसने सहायता की पेशकश की थी तो उसमें कुछ गलत नहीं था।" पार्थसारथी भोपाल त्रासदी के बाद तीन साल तक सरकार के प्रवक्ता थे।

केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम की अध्यक्षता में पुनर्गठित मंत्री समूह (जीओएम) की शुक्रवार को बैठक होगी। बैठक में पीड़ितों के आंसू पोंछने और उनके घावों पर मरहम लगाने के लिए कारगर कदम उठाने सहित इससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "भोपाल गैस कांड पर जीओएम की बैठक में चर्चा के लिए दो घंटे का समय आवंटित किया गया है। इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा होगी। दुर्भाग्यवश जिन पीड़ितों को उपयुक्त राहत नहीं मिल पाई है, इस पर भी चर्चा होगी।"

इस मंत्री समूह में केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद, वीरप्पा मोइली, एस. जयपाल रेड्डी, कमल नाथ, शैलेजा, एम.के.अझागिरी, पृथ्वीराज चव्हाण और जयराम रमेश शामिल हैं।

इस बीच, भोपाल गैस त्रासदी को लेकर अदालत के फैसले के विश्लेषण के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा बनाई गई विधि विशेषज्ञों की समिति ने अपना प्रारंभिक प्रतिवेदन सरकार को सौंप दिया है। इस प्रतिवेदन में सरकार को 12 सुझाव दिए गए हैं।

भोपाल में एंडरसन तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भाजपा ने प्रदर्शन किया और हवा में काले गुब्बारे छोड़े। भाजपा ने गिरफ्तारी की मांग को लेकर रोशनपुरा क्षेत्र में प्रदर्शन किया और दोनों के नाम लिखकर व तस्वीरें लगाकर काले गुब्बारे हवा में छोड़े।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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