एंडरसन को सुरक्षित भेजना ही एक मात्र विकल्प था : पूर्व अधिकारी
नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। भोपाल गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी और हादसे के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड कंपनी के प्रमुख वारेन एंडरसन को बाहर भेजने का फैसला 'सोच-समझकर' लिया गया था और सरकार के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार में प्रवक्ता रहे राजनयिक जी. पार्थसारथी ने आईएएनएस से कहा, "एंडरसन ने सहायता करने के लिए भारत आने का प्रस्ताव किया था और उसने अमेरिकी दूतावास के माध्यम से भारत सरकार से संपर्क साधा। यदि उसने सहायता की पेशकश की थी तो उसमें कुछ गलत नहीं था।"
राजीव गांधी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में सह सचिव रहे पार्थसारथी ने कहा, "यह सोच-समझकर लिया गया फैसला था क्योंकि सरकार के पास दूसरा विकल्प नहीं था। यूनियन कार्बाइड से पूरी तरह संबंध केवल इसलिए नहीं तोड़ सकता था क्योंकि कोई भारतीय इकाई की पैतृक कंपनी से मुआवजा चाहता था।" पार्थसारथी भोपाल त्रासदी के बाद तीन साल तक सरकार के प्रवक्ता थे।
पार्थसारथी ने यह भी कहा कि भोपाल में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह को सरकार के उच्च स्तर पर लिए गए इस फैसले के बारे में जानकारी नहीं थी इसलिए एंडरसन को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद जमानत पर रिहा करना पड़ा।
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री देश के दूसरे हिस्से में प्रचार कर रहे थे। कुछ माह पहले इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी। वह काफी विशेष परिस्थिति थी।"
पार्थसारथी का यह बयान नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में उप प्रमुख रहे गॉर्डन स्ट्रीब के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सुरक्षित रास्ता मिलने के आश्वासन के बाद ही एंडरसन ने भारत आने का फैसला किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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