अवैध थी बलिया में दुर्घटनाग्रस्त नाव
बलिया के जिलाधिकारी सेंथिल पांडियन ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया, "प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि वह एक अवैध नाव थी। हमने पाया कि नाविकों को लाइसेंस जारी करने वाली जिला परिषद के यहां वह नाव पंजीकृत नहीं थी। साथ ही नाविक के पास लोगों को लाने व ले जाने का निर्धारित लाइसेंस नहीं था।"
सोमवार को हुए इस हादसे की प्रारंभिक जांच के बाद जिला प्रशासन ने अब इस संबंध में जिला परिषद से जवाब मांगा है कि कैसे बिना प्रक्रियात्मक मानकों का पालन किए वह नाव घाट पर कार्य कर रही थी।
पांडियन ने कहा, "मैंने जिला परिषद के अधिकारियों से जनपद के अधिकृत घाटों, नावों और नाविकों की संख्या की विस्तृत रिपोर्ट के साथ आने को कहा है।"
गौरतलब है कि दुबहट थाना क्षेत्र का उजवलिया घाट, जहां सोमवार को हादसा हुआ था वह भी जिले के अधिकृत घाटों में नहीं आता था।
पांडियन ने कहा कि हमें बताया गया है कि जिले में गंगा और घाघरा नदियों के 14 अधिकृत घाट हैं। इस बारे में जब जिला परिषद के अध्यक्ष राम मंगल यादव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले में हम केवल जिला प्रशासन के समक्ष ही अपना बिंदु रखेंगे।
मालूम हो कि घटना के बाद मौके से फरार हो गए नाविक हरिवंश के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
जिले के अपर पुलिस अधीक्षक बद्री नाथ तिवारी ने गुरुवार को आईएएनएस से कहा कि नाविक फिलहाल फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि उजविलया घाट पर सोमवार सुबह गंगा नदी में नाव पलटने से 23 बच्चों सहित 61 लोगों की डूबकर मौत हो गई थी। ये लोग नाव पर सवार होकर मुंडन कराने जा रहे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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