मदद से महरूम हैं पीड़ित परिजन

मुंबई के कुर्ला रेलवे स्टेशन पर एक संभावित पीड़ित के परिजन ने कहा, "मैं अपने भाई से लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहा हूं। वह हावड़ा-कुर्ला ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस में सवार था, लेकिन उसका फोन काम नहीं कर रहा है।"

काफी परेशान दिख रहे परिजन ने कहा, "प्रशासन मेरे भाई के बारे में कुछ भी सूचना देने में विफल रहा है। उन्हें पता नहीं है कि कितने डिब्बे पटरी से उतरे हैं, कुछ पांच बता रहे हैं तो कुछ 13, मैं असहाय हूं।"

यह दुर्घटना उस समय हुई जब एक विस्फोट के कारण डिलक्स रेलगाड़ी के इंजन और 12 बोगियां पटरी से उतरने के बाद एक मालगाड़ी से टकरा गईं।

सुबह से ही रेलवे स्टेशन पर इंतजार कर रहे एक अन्य परिजन हरिदास गुप्ता ने कहा, "मेरी बहन और भांजा दुर्घटनाग्रस्त रेलगाड़ी में थे। मैं उसे मोबाइल फोन पर कॉल कर रहा हूं लेकिन वह बंद है।"

दुर्घटना की खबर से सुनने के तुरंत बाद स्टेशन पहुंचे गुप्ता ने कहा कि उनके पास कोई जानकारी नहीं है कि वे कैसे हैं। कोई कुछ नहीं बता रहा है। प्रशासन के पास कोई सूचना नहीं है।

दुर्घटना में मामूली रूप से घायल एक व्यक्ति ने आईएएनएस से फोन पर बताया कि रात करीब 1.10 बजे वह और उनके साथी खाना खा रहे थे तभी रेलगाड़ी के पटरी से उतरने की तेज आवाज सुनाई दी। सभी लोग स्तब्ध रह गए। विस्फोट की कोई आवाज नहीं सुनी गई।

उन्होंने कहा, "हम किसी तरह खिड़की के माध्यम से डिब्बे से बाहर निकलने में कामयाब रहे। हम दूसरों की सहायता करने पहुंचे.. कोई सहायता करने के लिए मौजूद नहीं था। मेरे सामने तीन मरे पड़े थे। इस बीच किसी ने मेरा समान चुरा लिया।"

अन्य यात्रियों की सहायता करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "रेलवे सुरक्षा बल का कोई जवान सहायता के लिए नहीं पहुंचा। जनता हमें बचाने दौड़ी लेकिन उनके पास कोई साधन न होने के कारण वे कुछ खास नहीं कर सके। रेलगाड़ी के पैन्ट्री यान के कर्मचारियों ने राहत कार्य में सहयोग किया।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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