लाहौर में मस्जिदों पर हमला, 72 की मौत (राउंडअप इंट्रो-1)
तीन घंटे तक चला हमला खत्म होने के बाद गढ़ी साहू और मॉडल टाउन इलाके की दोनों मस्जिदों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
अल्पसंख्यक अहमदी संप्रदाय की इन दोनों मस्जिदों के बीच की दूरी 15 किलोमीटर है। ऑनलाइन न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस हमले में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक (सिविल लाइन्स) हैदर अशरफ भी घायल हो गए हैं।
जियो टीवी के मुताबिक आतंकवादियों ने मस्जिद में लोगों के ऊपर ग्रेनेड दागे और अंधाधुंध गोलियां चलाईं।
शुक्रवार को नमाज के समय मस्जिदों करीब 1,500 लोगों की मौजूदगी में किए गए इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पंजाब ने ली है।
सुरक्षा बल मॉडल टॉउन इलाके में स्थित मस्जिद में हमला करने वाले सात आतंकवादियों से निपटने में सक्षम थे लेकिन आतंकवादियों ने मस्जिद में कुछ लोगों को बंधक बना लिया था। यह हमला दोपहर करीब ढाई बजे शुरू हुआ।
टेलीविजन फुटेज में दिखाया जा रहा है कि एक मस्जिद की छत पर बंदूकधारी अंधाधुंध गोलियां चला रहे हैं। गोलियां चलने की आवाज बाहर से भी सुनी गई।
मॉडल टाउन मस्जिद स्थित प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि छह से सात हथियारबंद लोग मस्जिद में दाखिल हुए और उन्होंने लोगों पर ग्रेनेड दागने शुरू कर दिए। इसके बाद उन्होंने लोगों पर अधांधुंध गोलियां चलाइर्ं।
इसके अलावा आतंकियों ने विस्फोटकों से भरे एक वाहन में विस्फोट कर दिया जिससे तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
एक पुलिस अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "मॉडल टाउन इलाके में मस्जिद पर हमला करने वाला एक आतंकवादी ढेर हो गया। इसमें एक घायल हो गया और एक गिरफ्तार कर लिया गया है।"
मॉडल टाउन मस्जिद से 17 लोगों की लाशें और 20 घायलों को जिन्ना अस्पताल पहुंचाया गया है।
इससे पहले 12 मार्च को लाहौर के एक बाजार में हुए एक आत्मघाती हमले में 45 लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
पिछले साल 15 अक्टूबर को तीन अलग-अलग पुलिस संस्थानों पर तालिबान आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में भारतीय सीमा से केवल 12 किलोमीटर दूर स्थित पुलिस प्रशिक्षण केंद्र को भी निशाना बनाया गया था। इन हमलों में 10 हमलावरों समेत 25 लोग मारे गए थे।
पुलिस प्रशिक्षण केंद्र पर यह दूसरा हमला था। इससे पहले 30 मार्च को भी यहां आठ आतंकियों ने हमला किया था इस हमले में सात प्रशिक्षुओं के अलावा दो नागरिक भी मारे गए थे।
इससे पहले तीन मार्च 2009 को पाकिस्तान-श्रीलंका टेस्ट मैच के लिए श्रीलंकाई टीम को गद्दाफी स्टेडियम लेकर जा रही बस पर हुई गोलीबारी में पांच पुलिसकर्मी मारे गए थे। श्रीलंका टीम के चार खिलाड़ी भी इस हमले में जख्मी हुए थे, इसके बाद यह दौरा खत्म कर दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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