मैंगलोर विमान हादसा : पायलट ने नियंत्रण खोया 158 की मौत (लीड-5)
बचे लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण(एएआई) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक बोइंग 737-800 की उड़ान संख्या आईएक्स 812 दुबई से मैंगलोर आते वक्त सुबह 6.05 बजे मैंगलोर हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
विमान ने जब उड़ान भरी थी तो उसमें 166 लोग सवार थे। इनमें 137 व्यस्क, 19 बच्चे, चार नवजात और छह चालक दल के सदस्य सवार थे।
दो दिन पहले तक यहां तेज बारिश हो रही थी लेकिन विमान के उतरते वक्त दृश्यता छह किलोमीटर तक थी, हवा शांत थी और बारिश नहीं हो रही थी। विमान को हालांकि जहां (टच डाउन जोन पर) उतरना था, वह उससे कुछ आगे उतरा और रनवे क्षेत्र से आगे निकल गया तथा एक गड्ढे में जा गिरा। माना जा रहा है कि रनवे पर उतरने के दौरान ही विमान का अगला पहिया फट गया था हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान अब तक जारी नहीं किया गया है।
हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सदानंद गौड़ा ने कहा कि विमान उतरते वक्त एक इंस्ट्रमेंट लैंडिंग सिस्टम से टकरा गया। इसके बाद चालक ने विमान पर से नियंत्रण खो दिया और वह गड्ढे में जा गिरा, जिससे उसमें आग लग गई।
एयर इंडिया के निदेशक अनूप श्रीवास्तव ने दुर्घटना के कारणों के बारे में विस्तार से बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है।
एएआई द्वारा जारी बयान में कहा गया कि इस रनवे की लम्बाई 2450 मीटर है और यहां 90 मीटर रनवे सुरक्षा क्षेत्र (रनवे इंड सेफ्टी एरिया) है। विमानचालक की ओर से किसी भी तरह की परेशानी होने की कोई सूचना नहीं दी गई थी। विमान का मुख्य पायलट सर्बियाई मूल का ब्रिटिश नागरिक था। टच डाउन जोन पर उतरने से चार मील पहले ही विमान को उतरने की हरी झंडी दे दी गई थी।
श्रीवास्तव ने मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि आठ यात्रियों को बचा लिया गया है जबकि दो यात्रियों का अब तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है। घायलों में कुछ की हालत बहुत गंभीर है।
उन्होंने कहा, "मैंगलोर हवाई अड्डे को फिलहाल बंद कर दिया गया है।" मैंगलोर हवाई अड्डे पर आने-जाने वाली सभी उड़ानें फिलहाल कालीकट से संचालित होंगी।"
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने बेंगलुरू में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "कुछेक यात्रियों को छोड़कर शेष किसी को बचाया नहीं जा सका। यह बहुत बड़ा हादसा है।" मुख्यमंत्री इसके बाद दुर्घटना स्थल के लिए रवाना हो गए। खराब मौसम के कारण हालांकि उन्हें हासन में ही विमान छोड़ कर सड़क मार्ग से मैंगलोर के लिए रवाना होना पड़ा।
अधिकारियों के मुताबिक राहत व बचाव कार्य के दौरान आग लगने के कारण उठ रहे धुएं से राहत कार्य में बाधा पहुंची। अग्निशमन विभाग की तकरीबन 20 गाड़ियों और 25 एम्बुलेंस को बचाव कार्य में लगाया गया।
हादसे में उमर फारूक नाम का एक शख्स जैसे-तैसे दुर्घटनाग्रस्त विमान से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा।
फारूक के संबंधियों ने बताया, "जैसे ही विमान उतरा, वैसे ही बहुत तेज आवाज आई। इसके तत्काल बाद उसमें आग लग गई और चारों ओर धुआं ही धुआं हो गया। विमान टूट गया और वह बाहर निकलने में कामयाब रहा।"
उन्होंने बताया कि फारूक के साथ दो-तीन और लोग वहां से कूदे थे लेकिन वे बच पाए या नहीं, यह पता नहीं है। फारूक के सिर और चेहरे का अधिकांश हिस्सा जल गया है। उन्होंने यह भी बताया कि चालक दल ने उतरने से पूर्व यात्रियों को आगाह भी नहीं किया था। यहां तक कि उन्हें सीट बेल्ट बांधने की सूचना तक नहीं दी गई।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित अन्य नेताओं ने इस विमान हादसे पर गहरा शोक जताया है। हादसे के मद्देनजर केरल में दो दिनों का शोक घोषित किया गया है। इस हादसे में मारे गए अधिकांश लोग केरल के थे।
केरल के मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन और गृह मंत्री कोडियारी बालाकृष्णन भी दुर्घटनास्थल का जायजा लेने के लिए हादसे के कुछ ही घंटों बाद मैंगलोर पहुंच गए। मैंगलोर कर्नाटक और केरल की सीमा पर है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "प्रधानमंत्री ने हादसे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रफुल्ल पटेल से बात की और उनसे दुर्घटनास्थल पर चल रहे राहत व बचाव कार्य के बारे में जानकारी ली।"
उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने प्रभावितों को हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया।
बयान में कहा गया कि इस दुखद हादसे को देखते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने के उपलक्ष्य पर प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है।
कर्नाटक के गृह मंत्री वी. एस. आचार्य ने कहा, "यह बहुत ही दुखद घटना है।" बाज्पे हवाई अड्डा मैंगलोर से 30 किलोमीटर और बेंगलुरू से 350 किलोमीटर दूर स्थित है। पहाड़ों और जंगलों से घिरे इस हवाई अड्डे को उड़ान भरने और उतरने के लिहाज से देश के सबसे खतरनाक हवाई अड्डों में गिना जाता है। इस क्षेत्र में पिछले दो दिन भारी बारिश भी हुई थी।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मैंगलोर हवाई अड्डे पर हुए विमान हादसे में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, "मैंगलोर में हुए दुखद विमान हादसे पर मैं अपनी गहरी संवेदना प्रकट करती हूं।"
भाजपा संसदीय दल के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "सुबह-सुबह हुआ यह विमान हादसा चौंकाने वाला है। मैंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा से बात की है और उनसे आग्रह किया है कि वह इस हादसे के पीड़ितों तक राहत व पुनर्वास कार्य पहुंचाने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें।"
उन्होंने कहा कि विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकारी निश्चित तौर पर आवश्यक जांच करेंगे कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ। "शोक संतृप्त परिवारों के प्रति मैं गहरी संवेदना प्रकट करता हूं।"
विमान हादसे पर भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने शोक जताया। गडकरी ने अपने शोक संदेश में कहा कि दुख की घड़ी में वह पीड़ितों के परिजनों के साथ हैं। उन्होंने कर्नाटक सरकार को राहत और बचाव कार्य तथा पीड़ितों के परिवारों को हर संभव सहायता पहुंचाने की सलाह दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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