पीडीएस कीमतों में वृद्धि का प्रस्ताव
खरीद के अन्य प्रासंगिक खर्चो की लागत भी बढ़ी है। इससे खाद्य राजसहायता में वृद्घि हुई है और गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों के लिए लागू केंद्रीय निर्गम मूल्य और खुले बाजार मूल्यों के बीच अत्यधिक अंतर हो गया है। सरकार गरीबी रेखा से ऊपर के लिए लागू गेहूं और चावल के केंद्रीय निर्गम मूल्य और बाजार मूल्य के बीच अंतर को कम करने की दृष्टि से गरीबी रेखा से ऊपर की श्रेणी के लिए लागू गेहूं और चावल के केंद्रीय निर्गम मूल्यों को संशोधित करने के प्रस्ताव की जांच कर रही है।
खाद्यान्नों के केंद्रीय निर्गम मूल्यों में वृद्धि करने से खाद्यान्नों के खुले बाजार मूल्यों और केंद्रीय निर्गम मूल्यों के बीच अंतर में कमी आएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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