Supreme Court: 'इग्नोर किया जाए', जस्टिस सूर्यकांत को गाली देने वाले दोनों लॉ छात्र गिरफ्तार, क्या बोले CJI ?

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, यहां पिछले हफ्ते हंगामा करने वाले दो लॉ स्टूडेंट को दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। इन दोनों पर कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारी के काम में दखल देने और सिक्योरिटी स्टाफ के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगा है। पकड़े गए दोनों आरोपियों के नाम प्रबल प्रताप सिंह और चंद्र भान हैं और दोनों यूपी के रहने वाले हैं।

मालूम हो कि 10 जुलाई को एक सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप और चंद्र भान ने चीफ जस्टिस को गाली दी, कोर्ट परिसर में हल्ला मचाया और कागज फाड़कर फेंके। जब सुप्रीम कोर्ट में तैनात सिक्योरिटी स्टाफ उसे शांत रहने के लिए कहा, उस वक्त इन दोनों ने उसे भी धक्का दे दिया और अपशब्द कहे।

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फिलहाल दिल्ली पुलिस ने दोनों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कीथी, दोनों का मेडिकल टेस्ट हुआ है जिसमें दोनों पूरी तरह से स्वस्थ बताए गए हैं।हालांकि इस मामले में चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत ने बड़ा बयान दिया और इस मामले में अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू नहीं करने का फैसला सुनाया है।

निराशा में होती हैं ऐसी हरकतें, इसे नजर अंदाज कर देना चाहिए: चीफ़ जस्टिस

चीफ़ जस्टिस ने कहा कि 'ये दोनों खुद निराश और हताश हैं, कभी-कभी हताशा में इस तरह की हरकतें हो जाती हैं इसलिए इसे नजर अंदाज कर देना चाहिए और इसे तूल देने से बचना चाहिए, हमारा पूरा ध्यान संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा पर होना चाहिए।'

कौन हैं दोनों आरोपी?

प्रबल प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है, वो लखनऊ यूनिवर्सिटी में LLB का थर्ड ईयर का स्टूडेंट है जबकि दूसरा आरोपी चंद्र भान रायबरेली का रहने वाला है और लॉ का सेकंड ईयर का स्टूडेंट है। पुलिस ने बताया कि दोनों के पास से आपत्तिजनक भाषा वाले कई पर्चे बरामद किए हैं, दोनों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उन्हें 29 जुलाई को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

कौन हैं चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत?

10 फरवरी 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्य कांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश हैं, न्यायाधीश बनने से पहले, कांत एक वरिष्ठ अधिवक्ता थे और उन्होंने हरियाणा के एडवोकेट जनरल के रूप में भी काम किया था। वे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, रांची के विजिटर भी हैं इसके अलावा, वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के पदेन संरक्षक-प्रमुख हैं।

कुरुक्षेत्र विवि से मास्टर ऑफ लॉ किया

हरियाणा के हिसार जिले के पेटवार गांव में जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत के पिता मदन गोपाल शर्मा संस्कृत के शिक्षक थे, उन्होंने 1981 में सरकारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार से भूगोल में बीए किया 2011 में कुरुक्षेत्र विवि से अपने मास्टर ऑफ लॉ किया है।

साल 2019 सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

09 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया था उसके बाद वो हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 9 मई 2019 को, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में उनकी पदोन्नति की सिफारिश की। 24 मई 2019 को, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

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