राष्ट्रपति भवन से हुई जनगणना की शुरुआत

भारत में जनगणना का काम पहली अप्रैल से शुरु हो गया है जिसके तहत नागरिकों का बायोमीट्रिक डाटाबेस तैयार होगा. जनगणना की शुरुआत राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से हुई जब गृह मंत्री पी चिदंबरम, गृह सचिव जीके पिल्लई और कई अधिकारी राष्ट्रपति भवन पहुँचे और राष्ट्रपति से ज़रूरी जानकारी ली.
जानकारी देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "मेरा नाम प्रतिभा देवी सिंह पाटिल है और मेरा स्थाई पता जलगाँव, महाराष्ट्र है." डाटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया के तहत पंद्रह साल से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों की तस्वीर खींची जाएगी और उंगलियों के निशान लिए जाएँगे. इस जानकारी का इस्तेमाल पहचान पत्र जारी करने के लिए होगा.
अधिकारी एक साल की अवधि के दौरान भारत के करीब 1.2 अरब लोगों का लिंग, काम और शिक्षा के आधार पर वर्गीकरण करेंगे. ये आज़ाद भारत की सातवीं जनगणना है. ये प्रकिया 1872 में शुरु हुई थी और हर दस साल पर जनगणना होती है.
सबसे बड़ा अभियान
अगले एक साल के दौरान करीब 25 लाख अधिकारी सात हज़ार से ज़्यादा कस्बों और साठ हज़ार गाँवों में घर-घर जाएँगे. पहले घरों की सूची तैयार होगी जिसमें घरों के बारे में सूचना इकट्ठा की जाएगी. इसके तहत पहली बार ये जानने की भी कोशिश की जाएगी कि इंटरनेट का इस्तेमाल कहाँ कहाँ हो रहा है और घरों में पानी और शौचालय उपलब्ध हैं या नहीं.
नागरिकों की गणना नौ से 28 फ़रवरी 2011 के बीच होगी. ये प्रक्रिया 11 महीनों तक चलेगी, इसमें एक करोड़ दस लाख टन कागज़ इस्तेमाल होगा और कुल खर्च होगा 60 अरब रुपए. बीबीसी संवाददाता संजय मजूमदार कहते हैं कि भारत में प्रामाणिक और प्राइमरी डाटा को केवल यही एक स्रोत है. जनगणना से आने वाले डाटा का उपयोग न केवल सरकारी नीतियाँ बनाने में किया जाता है बल्कि निजी कंपनियाँ भी इसी आधार पर अपने उत्पादों के लिए बाज़ार तलाश करती हैं. नवंबर से 16 अंकों वाला पहचान पत्र जारी होना शुरु होगा. जनगणना के नतीजे 2011 के मध्य तक आएँगे.












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