अवसादग्रस्त लोगों में हमेशा एकाग्रता की कमी नहीं होती
अवसाद और एकाग्रता के बीच संबंधों के अध्ययन के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर (यूटीएसडब्ल्यूएमसी) के शोधकर्ताओं ने करीब 20 साल के दौरान अवसाद पर हुए अध्ययनों का विश्लेषण किया।
यूटीएसडब्ल्यूएमसी में मनोविज्ञान के प्रमुख मुर्नो कुलम के अनुसार, अवसाद और संज्ञान (सोच, एकाग्रता और याददाश्त) के बीच संबंधों को न्यूरो-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कमजोर ढंग से समझा जाता है।
कुलम कहते हैं, "हमारा अध्ययन संज्ञानात्मक कार्यो पर अवसाद के प्रभावों के बारे में कुछ नैदानिक अवधारणों को चुनौती देता है। "
यूटीएसडब्ल्यूएमसी में मनोरोग के प्रोफेसर शॉन मैकक्लिंटॉक कहते हैं कि संज्ञान पर अवसाद का प्रभाव अलग-अलग रोगी में अलग अलग होता है। कई लक्षणों का उपयोग अवसाद का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। हमने देखा कि अवसाद के कुछ कारक कैसे संज्ञानात्मक व्यवहार में परेशानी पैदा कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने 1991 से 2007 के बीच प्रकाशित हुए करीब 35 अध्ययनों का विश्लेषण किया।
मैकक्लिंटॉक कहते हैं कि हमें इन अध्ययनों में काफी विभिन्नता नजर आई।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, प्रत्येक व्यक्ति में सूचना ग्रहण करने, उसकी प्रक्रिया और उस पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता अलग-अलग होती है, अवसाद का सीधा असर इस क्षमता पर पड़ता है। अवसादग्रस्तता में यही क्षमता कम हो जाती है।
इन निष्कर्षो को अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के एक जर्नल न्यूरोसाइकोलॉजी के जनवरी अंक में शामिल किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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