मोदी के हमले पर मनमोहन व प्रणब का जवाबी हमला (लीड-1)
नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर जवाबी हमला किया। मोदी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार गरीबों को सस्ता अनाज देने का अपना वादा नहीं निभा पाई है।
महंगाई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा बुलाए गए मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने आए मोदी ने सम्मेलन से इतर पत्रकारों से चर्चा में कहा, "महंगाई से निपटने के लिए जिस सामूहिक दृष्टि की आवश्यकता है, केंद्र सरकार के पास उसका अभाव है। राज्य सरकारें सक्रियता से कदम उठाने को तत्पर हैं लेकिन केंद्र के पास दृष्टि का अभाव है।"
इस बैठक को बहुत पहले बुलाए जाने की आवश्यकता जताते हुए मोदी ने कहा, "बढ़ती महंगाई रोकने के लिए केंद्र सरकार को एक कार्य योजना लेकर आने की जरूरत थी लेकिन इसके बावजूद सरकार इस बैठक में ऐसी कोई कार्य योजना लेकर नहीं आई।"
मोदी ने कहा कि कांग्रेस गरीबों को तीन रुपये प्रति किलो की दर से अनाज मुहैया कराने और शहरी गरीबों के लिए सामुदायिक रसोई शुरू करने का अपना वादा पूरा नहीं कर पाई है। मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की मूल्य वृद्धि रोकने में मिली सफलता का गुणगान किया।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि मनमोहन सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने चुनावी वादे याद हैं।
सूत्रों ने कहा कि मुखर्जी ने भी मोदी से कहा कि मूल्य वृद्धि के मुद्दे को राजनीतिक रंग न दें। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री इस समस्या के हल के लिए यहां जुटे हैं और कई ने अपने राज्यों में कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी है।
खाद्य पदार्थो के उत्पादन में आई वृद्धि के लिए किसान समुदाय को बधाई देते हुए मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपनी गलत नीतियों के चलते खाद्यान्नों की अर्थव्यवस्था का कुप्रबंधन किया।
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 10 फीसदी अनाज जमा करने की प्रक्रिया के दौरान बेकार हो जाता है जबकि 30 फीसदी खुले स्थान में रखे जाने के कारण बर्बाद हो जाता है।
मोदी ने दावा किया कि महंगाई रोकने के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मजबूती से कदम उठाए जबकि कांग्रेस शासित राज्य ऐसा करने में विफल रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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