नए रैनबसेरों में बिजली आपूर्ति और कंबलों की कमी की समस्याएं

सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि वह दिल्ली के बेघर लोगों के रहने लिए शाम तक व्यवस्था करे। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इन रैनबसेरों में कंबल, बिजली, भोजन और शौचालयों की पार्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के कुछ समय के भीतर ही 5,000 लोगों के रहने के लिए 37 नए रैनबसेरे स्थापित किए गए थे।

स्थानीय निकाय प्रशासन ने हालांकि अनुमान लगाया है कि दिल्ली में लगभग 150,000 लोग बेघर हैं जिनके लिए व्यवस्था करना एक मुश्किल काम है।

नगर निगम द्वारा स्थापित किए गए नए रैनबसेरों में अधिकांशत: सामुदायिक केंद्र शामिल हैं जिनमें शौचालयों की व्यवस्था है लेकिन कई महीनों से उनका प्रयोग नहीं किया गया है। कंबलों की कमी के साथ ही बिजली और पानी की आपूर्ति की समस्याएं सामने खड़ी हो रही हैं।

इन समस्यायों के संदर्भ में नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वास्तव में समस्याएं खड़ी हो रही हैं।

निगम के प्रवक्ता दीप माथुर ने आईएएनएस को बताया, "वास्तव में हम इस तरह की समस्यायों का सामना कर रहे हैं। यह आपातकालीन स्थिति में उठाया गया कदम था। थोड़े समय के भीतर ही इन जगहों को तैयार किया गया था। हम इस मामले से निपटने के लिए सभी संसाधनों का प्रयोग कर रहे हैं। "

ऐसा माना जा रहा है कि ये अतिरिक्त रैनबसेरे 4,510 पुरुषों और 410 महिलाओं को राहत पहुंचाएंगे। 37 नए रैनबसेरों में से केवल चार रैनबसेरे में ही महिलाएं और बच्चे रह सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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