अभियोजन पक्ष के वकील ने लगाई सुरक्षा की गुहार
फर्जी मुठभेड़ मामले में सोनभद्र त्वरित अदालत ने दोषी पाते हुए 13 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभियोजन पक्ष के वकील विकास शाक्य ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि सजा पाने वाले पुलिसकर्मी अपने सहयोगियों के जरिए उन्हें फोन पर धमकियां दिलावा रहे हैं।
विकास ने कहा, "मुझे धमकियां दी जा रही हैं कि जल्द ही मुझ्झे और मेरे पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। कुछ लोगों ने मेरे घर जाकर मेरे परिजनों को जान से मारने की धमकी भी दी।"
अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए विकास ने सोनभद्र पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री मायावती और राज्य के पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह को भी पत्र भेजकर सुरक्षा की गुहार लगाई।
विकास के मुताबिक दो सितम्बर 2003 को सोनभद्र रेलवे स्टेशन से झारखण्ड के गढ़वा निवासी बीएससी के छात्र प्रभात कुमार श्रीवास्तव और उसके दोस्त रमाशंकर साहू को शातिर बदमाश बताकर जिले के पिपरी थाने के पुलिसकर्मी रनटोला के जंगल में ले गए और वहां फर्जी मुठभेड़ में मार डाला। बाद में हुई जांच में मुठभेड़ को संदिग्ध पाया गया और इस वजह यह मामला आपराधिक जांच विभाग की अपराध शाखा (सीबीसीआईडी) को स्थानांतरित कर दिया गया।
सीबीसीआईडी ने जांच के बाद वर्ष 2006 में 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया, जिनमें से 13 को सोनभद्र त्वरित न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। दो पुलिसकर्मी कभी भी अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए और उन्हें पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। एक अन्य उपनिरीक्षक गत मंगलवार को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया, जब अदालत ने आत्मसमर्पण करने वाले आरोपी पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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