नई दिल्ली को चुनौती देने के बयान से पीछे हटे माओवादी
काठमांडू, 23 दिसम्बर (आईएएनएस)। नेपाली माओवादियों के प्रमुख, पुष्प कमल दहाल प्रचंड द्वारा भारत सरकार को चुनौती दिए जाने के 24 घंटे बाद ही माओवादी पार्टी अपने बयान से पीछे हट गई है। माओवादियों की ओर से कहा गया है कि यह बात महज एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं थी।
प्रचंड ने कहा था कि वह नेपाल की सत्ताधारी पार्टियों के बदले सीधे उनके आका नई दिल्ली के साथ बातचीत करेंगे।
माओवादी सांसद और माओवादी पार्टी के संसदीय दल के नेता नारायण काजी श्रेष्ठा ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री का आशय नेपाल की सत्ताधारी पार्टियों का मजाक उड़ाना था, क्योंकि वे कठपुतली की तरह गैरजिम्मेदार हैं।
माओवादियों द्वारा आहूत तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का मंगलवार को समापन करते हुए प्रचंड ने राजधानी काठमांडू में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में बार-बार कहा था कि वह नई दिल्ली जाने और भारत सरकार के साथ सीधे बातचीत करने को तैयार हैं, क्योंकि नेपाल की सत्ताधारी पार्टियां रोबोट हैं और वे भारत द्वारा नियंत्रित हैं।
प्रचंड ने महीने भर लंबे आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार अभी भी उनकी पार्टी की मांगें पूरी कर पाने में विफल होती है तो जनवरी से एक अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
माओवादी जहां एक ओर राष्ट्रपति राम बरन यादव द्वारा की गई सेना प्रमुख की पुनर्नियुक्ति को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं उनकी दूसरी मांग यह है कि वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन को समाप्त किया जाए और माओवादियों के नेतृत्व में एक नई सरकार गठित की जाए।
श्रेष्ठा ने कहा है कि नए अभियान के हिस्से के रूप में माओवादी संसद के घेराव का अपना कार्यक्रम वापस लें लेंगे।
श्रेष्ठा ने कहा है कि सत्ताधारी पार्टियां कुछ इस तरह की साजिश कर रही हैं, ताकि मई तक प्रस्तावित नया संविधान लागू न हो पाए। इसके लिए वे संसद को भंग कर सकती हैं, सेना की मदद से राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती हैं और खुद का कोई संविधान थोप सकती हैं।
श्रेष्ठा ने कहा कि इसे रोकने के लिए माओवादी संसद को चलने की अनुमति प्रदान करेंगे, लेकिन सड़कों पर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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