कोपेनहेगन समझौता बेसिक देशों के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती : पचौरी
पचौरी ने यहां संवाददाताओं को बताया, "तमाम अफ्रीकी देशों और छोटे द्विपीय देशों तथा निचली सतह वाले देशों को यह नहीं महसूस करना चाहिए कि वे बेसिक समूह की स्थितियों से अलग-थलग हैं। सभी छोटे देशों को एक साथ लेकर चलना इस समूह के लिए एक बड़ी कूटनीति चुनौती है।"
मालदीव और टुवालू तथा कई अफ्रीकी व लैटिन अमेरिकी देशों ने अमेरिका द्वारा तैयार किए गए इस समझौते पर बेसिक समूह के साथ एक बैठक में खुल कर आपत्ति खड़ी की थी।
पचौरी ने कहा है कि भारत छोटे विकासशील देशों को न तो अलग-थलग कर सकता है और न तो उसे ऐसा करना ही चाहिए। उसे उन छोटे देशों की हर संभव तरीके से मदद करनी चाहिए।
पचौरी ने कहा, "भारत को यह बात दिमाग में रखनी चाहिए कि यदि वह कोई स्वार्थी दृष्टिकोण अपना रहा है तो इससे न केवल जलवायु परिवर्तन के लिए, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी गंभीर समस्या खड़ी होगी। भारतीय अधिकारियों को पृथ्वी के पर्यावरण को बचाने के लिए चिंतत होना चाहिए और ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे कि हमारी भाषा और कार्रवाइयों को केवल भारत के राष्ट्रीय हित वाला ही समझा जाए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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