कोपेनहेगन समझौते में 'सलाह और विश्लेषण' की शर्त महत्वहीन : पचौरी
पचौरी ने यहां संवाददाताओं को बताया, "मैं नहीं समझता कि अंतर्राष्ट्रीय सलाह और विश्लेषण से किसी व्यक्ति के अधिकार के लिए चुनौती खड़ी होती है। इसका कोई महत्व नहीं है।"
दरअसल, कोपेनहेगन में बेसिक समूह में शामिल चारों देशों (ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन) के जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उठाए जाने वाले स्वयं के कदमों पर अंतर्राष्ट्रीय सलाह और विश्लेषण के लिए राजी होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथी पार्टियों ने देश की संप्रभुता के साथ समझौता करने का सरकार पर आरोप लगाया है।
पचौरी ने कहा, "यह शर्त इतनी कमजोर है कि इसे हमारी संप्रभुता के नुकसान के रूप में नहीं लिया जा सकता। मैं समझता हूं कि हमारी संप्रभुता को किसी भी रूप में स्पर्श नहीं किया गया है। चारों बेसिक देश एकजुट रहेंगे और किसी को इस प्रावधान का नाजायज लाभ उठाने का मौका नहीं देंगे। इस प्रावधान से जरा भी नुकसान नहीं होने वाला है।"
ज्ञात हो कि व्हाइट हाउस के सलाहकार डेविड अलेक्जेंडर ने रविवार को कहा था, "अब भारत, चीन को अपने लक्ष्य निर्धारित करने हैं। वे जो कुछ भी कर रहे हैं, अब हम उसकी समीक्षा करने की स्थिति में आ गए हैं। यदि वे अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं करते हैं तो हम उन्हें चुनौती देने की स्थिति में होंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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