भूमि हड़पने का आरोप सर्वोच्च न्यायालय में प्रोन्नति रोकेगा : दिनाकरन

बेंगलुरू, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। आरोपों से घिरे कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी.डी.दिनाकरन ने दावा किया है कि उन पर भूमि हड़पने और न्यायिक पद के दुरुपयोग का लगाया गया आरोप सर्वोच्च न्यायालय में उनकी प्रोन्नति को रोकेगा।

देश के प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन को 17 दिसंबर को भेजे अपने पत्र में दिनाकरन ने कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी 12 आरोप पूरी तरह निराधार हैं। दिनाकरन के इस पत्र की एक प्रति आईएएनएस के पास मौजूद है।

दिनाकरन ने पत्र में कहा है, "19 दिसंबर 1996 से सात अगस्त, 2008 तक मद्रास उच्च न्यायालय में बतौर न्यायाधीश के रूप में तथा 8 अगस्त 2008 से आज तक कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में मेरे ऊपर जो भी आरोप लगाए गए हैं, इन वर्षो के दौरान मैंने ऐसा कोई अनाचार या गलत काम नहीं किया है।"

दिनाकरन ने बालाकृष्णन को ऐसे समय में पत्र लिखा है, जब राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने गुरुवार को 75 सांसदों द्वारा दिनाकरन के खिलाफ महाभियोग लाए जाने संबंधी सौंपी गई एक याचिका को स्वीकार कर ली है।

एक दिन पहले ही बालाकृष्णन की ओर से कर्नाटक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार बुधिहाल ने कहा था कि दिनाकरन अगले आदेश तक न्यायालय में न्यायिक कार्यो से विरत रहेंगे।

लेकिन दिनाकरन ने सात दिसंबर से ही अदालत में सुनवाई करना बंद कर दिया है, क्योंकि केंद्र सरकार ने चार दिसंबर को निर्णय लिया था कि दिनाकरन को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा।

दिनाकरन ने सबंधित सबूतों से प्रमाणित 11 पृष्ठों के अपने पत्र में कहा है, "इन आरोपों में कुछ भी नहीं है, लेकिन ये आरोप सर्वोच्च न्यायालय में मेरी प्रोन्नति को रोकने के उद्देश्य से प्रेरित हैं, जिसकी सिफारिश आपने स्वयं और कॉलेजियम के न्यायाधीशों ने की थी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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