संघ और मुस्लिम लीग जुड़वा भाई: येचुरी

Sitaram Yechury
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जिन्ना को लेकर मचे बवाल पर चुटकी लेते हुए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो के सदस्य और सांसद सीताराम येचुरी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और मुस्लिम लीग को जुड़वा भाई बताया है। येचुरी ने कहा कि दोनों भाई बचपन में बिछड़ गए थे।

येचुरी ने भाजपा की पहचान को संकट में बताते हुए कहा कि इस राजनैतिक दल के पास फिलहाल कोई विचारधारा ही नहीं है इसलिए पार्टी के भीतर मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर उलझन बनी हुई है।

सूखा से बड़ा सवाल जिन्ना

येचुरी ने भाजपा की विचारधारा और अब तक दिए गए नारों का जिक्र करते हुए कहा कि "जनसंघ का जोर एकात्म मानववाद पर था, भाजपा का गांधीवादी समाजवाद पर जोर है तो आडवाणी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आधार बनाया। वह सवाल करते हैं कि वर्तमान में किस पर जोर है? पता नहीं। इस दल के लिए आज सूखा और महंगाई से बड़ा सवाल जिन्ना है"।

पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने भोपाल आए येचुरी ने कहा कि भाजपा के सामने पहचान का संकट है। उसका संघ से नाता टूट नहीं सकता। पार्टी 1996 में 13 दिन की सरकार चलाकर जान गई है कि कट्टर हिन्दुत्व को लेकर वह सरकार बना नहीं सकती क्योंकि उसे सहयोगी दलों का समर्थन चाहिए। साथ ही हिन्दुत्व के मुद्दे से पीछे हटने पर संघ के नाराज होने का खतरा है। भाजपा में यही बुनियादी अंतर्विरोध है।

येचुरी ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद में जिन्ना की तारीफ करनी पड़ती थी। वह सोचते थे कि जिन्ना की तारीफ करने से मुसलमानों का साथ उन्हें मिल जाएगा। येचुरी इसे अजीबोगरीब सोच करार देते हैं। भाजपा यह नहीं जानती है कि देश के बंटवारे से सबसे ज्यादा नुकसान उस मुसलमान का हुआ है जो भारत में रह गया है।

सावरकर ने की थी दो देश की बात

देश के बंटवारे और जिन्ना को लेकर भाजपा की ओर से की जाने वाली टिप्पणियों के सवाल पर येचुरी ने कहा कि हिंदू सभा में सबसे पहले दो देश की बात सावरकर ने की थी। उसके तीन साल बाद जिन्ना ने दो राष्ट्र के मसले को आगे बढ़ाया। भाजपा के पास राष्ट्रीय आंदोलन की हिस्सेदारी को लेकर बताने के लिए कुछ नहीं है, क्योंकि उसने किया ही कुछ नहीं है। इसीलिए अपनी विश्वसनीयता बनाने के लिए कभी जिन्ना तो कभी सरदार बल्लभ भाई पटेल को लेकर जिरह छेड़ दी जाती है।

केंद्र सरकार के 100 दिन पूरे होने पर उन्होंने कहा कि शुरुआत में जो 25 बिंदू तय किए गए थे उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ है। संसद में स्टेंडिंग कमेटी तक नहीं बन पाई है। इस कमेटी की सदन की कार्यवाही में अहम भूमिका होती है क्योंकि किसी भी बिल का यही कमेटी अध्ययन कर अधिकारियों से चर्चा कर जरूरी सुधार आदि करती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+