संप्रग से देश के महत्वपूर्ण हितों को खतरा : आडवाणी (राउंडअप)

पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आडवाणी ने कहा, "सीमापार आतंकवाद के प्रति सरकार के नरम और समझौतावादी रवैये और वोट बैंक के वायरस ने भारत की आंतरिक सुरक्षा को इतना कमजोर कर दिया है जितना कि इससे पहले कभी नहीं थी।"

भाजपा की रविवार को समाप्त हुई बैठक में पार्टी नेताओं ने आशा जताई कि भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सत्ता में वापस आएगा, क्योंकि कांग्रेस आंतरिक सुरक्षा सहित अन्य सभी मोर्चो पर विफल रही है।

आडवाणी ने कहा कि संप्रग सरकार के पांच वर्ष का शासनकाल 1980 के दशक के आरंभ के बाद, सबसे अधिक आतंकवादी हमलों और मौतों का प्रत्यक्षदर्शी है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास न तो आतंकवाद से लड़ने की इच्छाशक्ति है और न ही कोई स्पष्ट नीति।

आडवाणी ने रविवार को कहा कि यह मानना गलत होगा कि पार्टी फिर से राम-मंदिर मुद्दे पर लौट आई है, क्योंकि उसने कभी ईश्वर को छोड़ा ही नहीं था। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर गर्व है।

भाजपा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक के अंतिम दिन पार्टी सदस्यों को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा, "चाहे राम सेतु या फिर अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा हो हमने कभी राम को नहीं छोड़ा।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि राम की सही जीत तब होगी जब अयोध्या में एक भव्य मंदिर का निर्माण हो जाए।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार आडवाणी ने कहा, "एक बार एक पत्रकार ने मुझसे पूछा कि क्या नरेंद्र मोदी का कद पार्टी से बड़ा होता जा रहा है। मैंने जवाब दिया कि यदि किसी परिवार का सदस्य परिवार के मुखिया से ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है तो यह समूचे परिवार के लिए गर्व की बात है।"

उन्होंने कहा कि एक बार पहले भी अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में ऐसा कहा जा चुका है। मोदी की तारीफ करते हुए आडवाणी ने कहा कि लोगों ने एक दफा नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा था और लेकिन वह गुजरात में 2007 में हुए चुनावों में जीतकर आए।

आडवाणी ने रविवार को कांग्रेस का परोक्ष उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी, 'किसी परिवार द्वारा नहीं चलाई जाती।' आडवाणी ने कहा, "यह दुखद है कि हमारी राजनीति में कई तरह की पार्टियां हैं। उनमें से एक वंशवादी है।" उन्होंने कहा, "मैं कांग्रेस का जिक्र नहीं कर रहा हूं।"

आडवाणी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अनुकरणीय आचरण करें ताकि हमारे 'अलग पार्टी' होने के दावे को उचित ठहराया जा सके।

भाजपा ने रविवार को विभिन्न राज्यों में चुनाव अभियान और रणनीति के प्रभारी नेताओं के नामों की घोषणा भी की। आगामी लोकसभा चुनावों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिमी भारत में और अरुण जेटली सर्वाधिक जनसंख्या वाले प्रांत उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चुनाव संचालन प्रभारी होंगे।

पार्टी के बयान में कहा गया है कि मोदी गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन एवं दीव, दादरा और नगर हवेली के लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। भाजपा के प्रमुख रणनीति विशेषज्ञ माने जाने वाले जेटली को 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, दिल्ली, पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एम.वेंकैया नायडू को कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पांडिचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुषमा स्वराज को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्यों का प्रभारी बनाया गया है।

शांता कुमार और भगत सिंह कोश्यारी को जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा, वी.सतीश को उड़ीसा और सुदान सिंह को राजस्थान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एस.एस. अहलूवालिया, हरेंद्र प्रताप और चंद्रशेखर को क्रमश: असम, उत्तरपूर्व और सिक्किम के चुनाव का प्रभार सौंपा गया है। भाजपा ने कहा कि अहलूवालिया पश्चिम बंगाल राज्य के भी प्रभारी होंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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