लोक आस्था का प्रतीक है मुंगेर का सीताकुंड
0सीताकुंड के आस-पास ही रामकुंड, लक्ष्मणकुंड, भरतकुंड तथा शत्रुघ्नकुंड भी है लेकिन इसे चमत्कार ही कहा जा सकता है कि पांच-छह फुट की दूरी पर स्थित सीताकुंड का पानी तो गरम रहता है जबकि शेष सभी कुंडों का पानी ठंडा रहता है। वैसे वर्ष के चार माह अप्रैल से जुलाई तक सीताकुंड का पानी भी ठंडा हो जाता है।
मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर सीताकुंड के विषय में पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम को कुम्बांधर ऋषि ने सलाह दी थी कि रावण के संहार के बाद आपको ब्राह्मण हत्या का पाप लगा है, इसलिए आप सारे तीर्थस्थलों का भ्रमण कर इस पाप से मुक्ति पा लें। इसी दौरान राम सपरिवार यहां आकर एक आश्रम में रूके थे।
धार्मिक मान्यताओं पर विश्वास करें तो आश्रम के ऋषियों ने सभी के हाथों से प्रसाद ग्रहण किया था लेकिन सीता के हाथ से प्रसाद ग्रहण नहीं किया। ऐसा रावण द्वारा सीता हरण किये जाने के कारण हुआ। तब सीता ने यहीं पर अग्नि परीक्षा दी थी।
जाने माने लेखक एवं इतिहासविद् 80 वर्षीय लक्ष्मीकांत मिश्र ने आईएएनएस को बताया कि लोगों की ऐसी मान्यता है कि जानकी कुंड के स्मरण मात्र से श्रद्धालुओं की इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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