काजीरंगा में 3 महीने में 9 बाघों की मौत
पर्यावरण और वन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने उद्यान को शिकारियों के खतरे से अगाह करते हुए कड़े नियम बनाने के लिए कहा है।
एनटीसीए ने कहा, "खुफिया रिपोर्टों के अनुसार बाघ के हत्यारे छुपे हुए हैं।"
असम के वन्यजीव अधिकारी ने जहां बाघों की मौत की पुष्टि की है, वहीं एनटीसीए द्वारा जताए गए खतरों से इंकार किया है।
असम के मुख्य वन्यजीव वार्डन एम.सी.मालाकार ने कहा, "काजीरंगा में नौ बाघों की मौत हुई लेकिन एक को भी शिकारियों ने नहीं मारा। तीन की मौत अधिक उम्र की वजह से हुई, एक आपसी लड़ाई से, एक ग्रामीणों द्वारा जहर दिए जाने से और एक की मौत भैंसों से लड़ाई के दौरान हुई। तीन अन्य का शव दबा हुआ मिला। "
मालाकार ने कहा कि यदि बाघों का शिकार किया जाता तो शिकारी उसकी खाल और अंगों को ले जाते लेकिन मृत पाए सभी बाघों के शव से कोई अंग गायब नहीं था।
गुवाहाटी से 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित काजीरंगा में सबसे अधिक एक सिंग वाला गैंडा पाया जाता है। वर्ष 2006 में हुई पशुगणना के अनुसार विश्व की कुल 2,700 जंगली पशुओं में से 1,855 काजीरंगा में रहते हैं।
जहां काजीरंगा वर्ल्ड हेरिटेज स्थल है, वहीं प्रोजेक्ट टाइगर स्कीम के तहत यह टाइगर रिजर्व क्षेत्र भी है।
वर्ष 2000 में हुई पशुगणना के अनुसार यहां 86 रॉयल बंगाल टाइगर्स थे। देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के अनुसार असम में बाघों की संख्या 70 बताई गई।
मालाकार ने कहा, "हमारा मानना है कि काजीरंगा में बाघों की संख्या में वर्ष 2000 की तुलना में वृद्धि हुई है।"
डब्ल्यूआईआई द्वारा की गई पशुगणना के अनुसार वर्तमान में देश में केवल 1,400 बाघ हैं। इस गणना से वन्यजीवों को लेकर काम कर रही संस्थाओं और सरकार भी चिंतित हो गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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