'जिंदगी में पहली बार देखी मुठभेड़'
नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। शाम के लगभग चार बज रहे थे। मैं ऑटोरिक्शा से अपने दफ्तर जा रही थी। रास्ते में मुझे झपकी सी आ रही थी कि अचानक ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी। मैं कुछ समझ पाती इससे पहले उसने कहा, "गोलियां चल रहीं है मैडम, मैं देखकर आता हूं।"
मैं दंग रह गई। राजधानी में वह भी दिन के चार बजे गोलियां। विश्वास नहीं हो रहा था। जिंदगी में पहली बार मुठभेड़ को इतने करीब से देखा।
पता चला कि दरअसल, यूसुफ सराय को सफदरजंग एन्क्लेव से जोड़ने वाली सड़क पर ग्रीनपार्क एक्सटेंशन में मोहिंदर अस्पताल के तुरंत बाद मुठभेड़ चल रही है।
इस बीच, रह-रह कर कुछ मिनटों तक गोली चलती रही। मैं ऑटोरिक्शा में ही बैठी रही। अंदर मुझे घबराहट होने लगी। मैं रिक्शे से उतर गई और उन लोगों के पास जा पहुंची, जो एक बड़े कूड़ेदान के पीछे से मुठभेड़ को देख रहे थे। मैंने भी देखने की कोशिश की कि आखिर हो क्या रहा है?
इसी बीच वहां खड़े एक व्यक्ति ने कहा, "मुझे लगता है कि गैंगवार है।" मुझे भी यही लगा।
थोड़ी देर में गोलियों की आवाज थम जाती है। इसके कुछ देर बाद हम आगे बढ़े तो किसी ने कहा, "चार शव पड़े हैं।" मैंने भी आगे बढ़कर देखा तो पता चला वाकई में वहां चार शव गिरे थे।
मैंने देखा, "अपराधी सड़क पर नीचे गिरे हुए थे। इनमें दो खून से लथपथ थे।" बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि चारों अपराधी घायल हैं।
इसके बाद पुलिस ने कुछ वाहनों की सहायता से यातायात रोक दिया। सादे कपड़ों में बुलेटप्रूफ जैकेट पहने और हाथों में रिवाल्वर लिए कुछ पुलिसवालों ने भीड़ को वहां से हट जाने को कहा। इसके बावजूद भीड़ बढ़नी शुरू हो गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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