अल्पसंख्यकों में आत्मविश्वास जगाया ओवैसी ने(श्रद्धांजलि)
हैदराबाद, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। अगर देश में कुछ चुनिंदा मुस्लिम राजनेताओं की चर्चा हो तो मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसल्मीन (एमआईएम) के अध्यक्ष सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी का नाम हमेशा शीर्ष में गिना जाएगा। ओवैसी का सोमवार को हैदराबाद में निधन हो गया और इसी के साथ ही दक्षिण भारत में मुस्लिम नेतृत्व में एक सूनापन सा छा गया।
हैदराबाद, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। अगर देश में कुछ चुनिंदा मुस्लिम राजनेताओं की चर्चा हो तो मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसल्मीन (एमआईएम) के अध्यक्ष सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी का नाम हमेशा शीर्ष में गिना जाएगा। ओवैसी का सोमवार को हैदराबाद में निधन हो गया और इसी के साथ ही दक्षिण भारत में मुस्लिम नेतृत्व में एक सूनापन सा छा गया।
ओवैसी अपने चाहने वालों के बीच 'सालार-ए-मिल्लत' (समुदाय का सेनापति) के नाम से मशहूर थे। उन्होंने एक सेनापति की ही तरह एमआईएम को आंध्र पद्रेश की सियासत में एक बड़ी ताकत के रूप में खड़ा कर दिया है।
पिछले 40 वर्षो से भी अधिक समय तक सियासत की दुनिया में अपनी छाप छोड़ने वाले ओवैसी का निधन 76 वर्ष की अवस्था में हुआ। वर्ष 1975 से अब तक एमआईएम के अध्यक्ष पद पर काबिज रहने वाले ओवैसी 1984 से 2004 तक लगातार छह बार लोकसभा के लिए चुने गए। अब उनकी सियासी विरासत को उनके बड़े पुत्र असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी बखूबी संभाल रहे हैं। असदुद्दीन लोकसभा के सदस्य हैं तो अकबरुद्दीन आंध्र विधानसभा में पार्टी के विधायक दल के नेता हैं।
ओवैसी के पिता अब्दुल वहीद ओवैसी ने एमआईएम में जान फूंकने का काम किया था और फिर सुल्तान सलाउद्दीन ओवैसी पार्टी को एक अहम मुकाम तक लेकर गए। उनके ऊपर कांग्रेस से गुप्त समझौते तक का राजनीतिक आरोप लगा लेकिन वे हमेशा ही एक मंझे राजनेता की तरह अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने में सफल रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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