उत्तराखंड के बच्चों पर तैयार रिपोर्ट राजधानी में पेश
नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। उत्तराखंड के बच्चों ने शुक्रवार को राजधानी में आयोजित एक तीन दिवसीय कार्यशाला में बाल अधिकारों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट 'वैकल्पिक आख्या' पेश की। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत करने के लिए तैयार की गई है।
राजधानी के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कार्यशाला में 'उमंग' कार्यक्रम के तहत तैयार रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बच्चों ने कहा कि उत्तराखंड में बच्चे गरीबी और आधारभूत ढांचे की कमी के कारण अपने अधिकारों से वंचित हैं। बाल पंचायत से जुड़े इन बच्चों ने प्राथमिक शिक्षा, जन्म प्रमाणपत्र और भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर राज्य के 13 जिलों के 142 स्कूलों का सर्वेक्षण किया।
रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बच्चों ने बताया कि 142 स्कूलों में केवल 26 ऐसे स्कूल हैं जहां बच्चे शौचालय का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि 106 स्कूलों में शौचालय बारहों महीने बंद पड़े रहते हैं और 10 स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
रिपोर्ट से यह बात सामने आई कि 142 स्कूलों में 38 स्कूल ऐसे हैं जहां पानी की सुविधा नहीं है और इन स्कूलों में पढ़ने वाले केवल 8.6 प्रतिशत बच्चों का जन्म पंजीकरण कराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों में बच्चों के बीच जातिगत भेदभाव की भावना भी देखी गई है, जबकि धर्म आधारित भेदभाव की शिकायत केवल दो जगहों से आई हैं।
रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए आकांक्षा नामक छात्रा ने आंकड़े इकट्ठा करते समय आई मुश्किलों का जिक्र किया। यह रिपोर्ट 'श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम और प्लान इंडिया' (एसबीएमए) नामक संगठन के सहयोग से बाल पंचायत के प्रतिनिधियों ने तैयार की है। उल्लेखनीय है कि बच्चों द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र में पेश किया जाना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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