हिटलर के 'उपहार' पर नेपाल में विवाद
सुदेशना सरकार
सुदेशना सरकार
काठमांडू, 20 जून (आईएएनएस)। नेपाल के नारायणहिती महल के परिसर में दशकों से पड़ी उस खस्ताहाल मर्सिडीज कार के बारे में मीडिया का यह दावा कमजोर पड़ गया है कि जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने यह गाड़ी तत्कालीन महाराज त्रिभुवन को उपहार में भेंट की थी। एक पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी ने यह दावा किया है कि वह कार मर्सिडीज नहीं, बल्कि डैमलर बेंज थी और यह दशकों से भारत में पड़ी है।
नेपाल के एक ताकतवर राजनीतिक परिवार की एक महिला का दावा है कि हिटलर ने त्रिभुवन को डैमलर कार भेंट की थी। हिटलर के उपहार को लेकर तब विवाद खड़ा हुआ जब मीडिया ने दावा किया कि महल के अहाते में जंग खा रही मर्सिडीज कार दशकों पहले हिटलर ने त्रिभुवन को दी थी। इसे 1939 माडल की गाड़ी बताया गया। कहा यह भी गया कि यह काठमांडू घाटी की पहली कार थी और तब नेपाल में ऐसे वाहनों के लिए उपयुक्त सड़कें न होने के कारण इसे भारत होते हुए नेपाल लाने के लिए कुलियों की सेवा ली गई थी।
नेपाल के सातवें प्रधानमंत्री जुधा शमशेर जंग बहादुर राणा की 92 वर्षीया पुत्री जनक राज्य लक्ष्मी देवी शाह ने मीडिया के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह गाड़ी डैमलर बेंज थी। शमशेर जंग ने तब के शाह राजाओं को कठपुतली बना दिया था और उन्होंने वास्तविक शासक की हैसियत से नेपाल पर 13 साल शासन किया। 1945 में उन्होंने अपने भतीजे के लिए कुर्सी खाली कर दी और भारत के देहरादून शहर में जा बसे। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। इस महिला का कहना है कि उनके पिता यह कार देहरादून ले गए थे। जब वह छात्रा हुआ करती थी तब इस कार की सवारी करती थी।
तब ऐसी महंगी कार आर्डर पर बना करती थी। उस वक्त इस माडल की महज दो कारें थीं। एक कार का इस्तेमाल खुद हिटलर करता था, जबकि दूसरी कार संभव: उसने द्वितीय विश्व युद्घ के दौरान नेपाल की वफादारी हासिल करने के लिए नेपाल नरेश को भेंट की थी।
जनक राज्य लक्ष्मी 60 के दशक में भारत से नेपाल आ गइर्ं। अभी भी उस कार की मालकिन राज्य लक्ष्मी ही हैं। उन्होंने बताया कि यह कार देहरादून में उनके भाई सुशील शमशेर जंग बहादुर राणा की देखरेख में पड़ी है। देहरादून के गुरु रोड इलाके में इस परिवार का बंगला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications