संप्रग सरकार के भाग्य का फैसला 25 जून को : वामदल (लीड-1)
नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। वामपंथी दलों ने आज स्पष्ट किया है कि आगामी 25 जून को यह तय हो जाएगा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार सत्ता में बनी रहेगी या फिर उसे जाना पड़ेगा।
परमाणु करार के मसले पर अपने रुख पर अड़े वामपंथी दलों को मुद्रास्फीति की रिकार्ड दर ने सरकार पर बरसने का आज एक और बहाना दे दिया। महंगाई की दर पिछले 13 वर्षो के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर 11.05 फीसदी पर पहुंच गई।
मुद्रास्फीति की ताजा दर के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में वामदलों द्वारा दिए गए सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
माकपा ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण ही मुद्रास्फीति की दर ने पिछले 13 वर्षो का रिकार्ड पार किया है।
माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि परमाणु करार के मुद्दे पर गठित संप्रग और वामदलों की समिति की आगामी 25 जून को होने वाली बैठक में सरकार का भविष्य तय हो जाएगा।
संवाददाताओं से बातचीत में करात ने कहा, "25 जून को स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार बचेगी या नहीं।"
इससे पहले माकपा की छात्र इकाई 'स्टूडेंट फेडरेशन आफ इंडिया' (एसएफआई) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए करात ने कहा, "हमें उम्मीद है कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। इसके लिए प्रयास जारी हैं।"
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य एस. रामचंद्र पिल्लई ने आईएएनएस को बताया, "सरकार परमाणु करार पर आगे बढ़ेगी तो हमारे कदम राष्ट्रपति भवन की ओर जाएंगे।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार अपने लगभग साढ़े चार साल के कार्यकाल के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है।
माकपा सूत्रों का कहना है कि संप्रग का कोई भी घटक दल जल्द चुनाव के पक्ष में नहीं है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) भले ही करार के मसले पर खुले तौर पर सरकार को समर्थन देने की बात कर रहे हैं लेकिन बैठकों के अंदर वे सरकार को वामदलों को साथ लेकर चलने की बात करते हैं।
इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार ने करात से भेंट कर मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति पर चर्चा की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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