महंगाई दर 13 साल के सर्वोच्च स्तर पर, सरकार की चिंता बढ़ी (लीड-1)

नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। भारत अमेरिकी परमाणु करार को लेकर पहले से पेरशान सरकार की परेशानियों को रिकार्ड महंगाई दर ने और बढ़ा दिया है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) से जारी आंकड़ों के अनुसार 7 जून को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान महंगाई की वार्षिक दर पिछले 13 वर्षो के उच्चतम स्तर यानी 11.05 प्रतिशत दर्ज की गई।

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि किए जाने के कारण महंगाई ने यह छलांग लगाई है, क्योंकि इससे पहले के सप्ताह के दौरान यह 8.5 प्रतिशत के स्तर पर थी।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक 7 जून को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान ईंधन, ऊर्जा और स्नेहक (लुब्रिकेंट) के थोक मूल्य सूचकांक में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, हालांकि इस दौरान खाद्य वस्तुओं की थोक मूल्य सूचकांक में 1.1 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।

मुद्रास्फीति के नवीनतम अस्थायी आंकड़ों के अनुसार सात जून को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान लाइट डीजल तेल के थोक मूल्य सूचकांक में 21 प्रतिशत, रसोई गैस (एलपीजी) में 20 प्रतिशत, नैप्था में 17 प्रतिशत, फर्नेस ऑयल में 15 प्रतिशत, विमान ईंधन (एटीएफ) में 14 प्रतिशत, पेट्रोल में 11 प्रतिशत, हाई स्पीड डीजल में 10 प्रतिशत और बिटुमेन में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

इस दौरान गैर खाद्य पदार्थो की कीमतों में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

देश में बढ़ रही महंगाई का देश के शेयर बाजारों पर भी आज नकारात्मक असर देखने को मिला। मुंबई स्टाक एक्सचेंज (बीएसई)का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स आज 516.7 अंक गिरकर बंद हुआ। अगस्त 2007 के बाद सेंसेक्स में यह सबसे बड़ी गिरावट है।

उधर, मुद्रास्फीति (महंगाई) की दर 13 साल के रिकार्ड स्तर पर चले जाने से संबंधित ताजा आंकड़े जारी होने के तुरंत बाद वित्त मंत्रालय ने मंत्रिमंडल को महंगे ईंधन के महंगाई पर प्रभाव को लेकर आगाह किया है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक सात जून को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान महंगाई की दर के 11.05 प्रतिशत के रिकार्ड स्तर पर चले जाने से चिंतित वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, "पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का महंगाई के ताजा आंकड़ों में 94 प्रतिशत योगदान है।"

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष चार जून को पेट्रोल पांच रुपये प्रति लीटर, डीजल तीन रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस 50 रुपये प्रति सिलेंडर महंगा कर दिया था।

चिदंबरम ने कहा, "ईंधन की कीमतें बढ़ाए जाने के बाद अपेक्षित था कि महंगाई की दर दो अंकों तक चली जाएगी। हमने मंत्रिमंडल को इस संबंध में आगाह कर दिया है।"

वित्त मंत्री ने कहा, "यह बड़ी कठिन घड़ी है। फिलहाल मुद्रा नीति को और कड़ी किए जाने की जरूरत है। जनता की परेशानियों को सरकार बखूबी समझती है।"

महंगाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने अपने बयान में कहा है कि महंगाई का 11.05 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाना देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सीआईआई के अध्यक्ष के. वी. कामथ के अनुसार महंगाई आंकड़ों में वृद्धि अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा गत 4 जून को ईंधन की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के बाद से ही यह स्पष्ट हो गया था कि मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर इसका असर पड़ना लाजिमी है।

रिकार्ड महंगाई को अर्थव्यस्वस्था के लिए अशुभ मानते हुए सीआईआई ने कहा है कि सरकार के सामने इसने बड़ी चुनौती पेश की है।

सरकारी प्रयासों को पर्याप्त करार देते हुए सीआईआई ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ रही मुद्रास्फीति की वजह से सरकार के वित्तीय व मौद्रिक उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं।

सीआईआई ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए मौद्रिक व वित्तीय उपायों से इतर (आउट आफ बॉक्स साल्युशंस ) आपूर्ति प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया है।

एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल के अनुसार आने वाले समय में तेल की कीमतों में नरमी आने के संकेत मिल रहे हैं और ऐसी स्थिति में जरूरी वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

बढ़ती महंगाई को लेकर वामदलों व विपक्षी दलों ने सत्ताधारी दल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। मुद्रास्फीति की दर पिछले 13 वर्षो के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाने के लिए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सीधे तौर पर इसके लिए कटघरे में खड़ा किया है।

परमाणु करार के मुद्दे पर माकपा द्वारा सरकार गिराने की दी गई धमकी के दूसरे ही दिन महंगाई की दर आज 11.05 फीसदी पर पहुंच गई।

माकपा ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण ही मुद्रास्फीति की दर ने पिछले 13 वर्षो का रिकार्ड पार किया है।

माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि दो अंकों में पहुंची मुद्रास्फीती की दर का आम जनजीवन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। मौजूदा परिस्थिति के लिए मनमोहन सिंह की सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है।

माकपा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में वामदलों द्वारा दिए गए सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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