बाढ़ का पानी तो कम हुआ लेकिन मानवीय त्रासदी जारी (लीड-1)
नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। पूर्वी भारत के अधिकांश हिस्सों में आई बाढ़ के पानी में तो कमी आई है लेकिन इस त्रासदी से प्रभावित हजारों लोग अभी भी भोजन और पानी के लिए तरस रहे हैं।
नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। पूर्वी भारत के अधिकांश हिस्सों में आई बाढ़ के पानी में तो कमी आई है लेकिन इस त्रासदी से प्रभावित हजारों लोग अभी भी भोजन और पानी के लिए तरस रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है और इसकी चपेट में आकर मरने वालों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है जबकि दो लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं। यहां की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।
पश्चिम बंगाल में तो बाढ़ से लगभग 20 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित पश्चिमी मिदनापुर जिले में सबसे अधिक 14 लोगों की मौत हुई है। वहीं पूर्वी मिदनापुर जिले में मरने वालों की संख्या पांच हो गई है।
बाढ़ की स्थिति से चिंतित राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने पूर्वी मिदनापुर के कोलकाघाट के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने जिले के आला अधिकारियों के साथ बैठक की और बाढ़ से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की।
बाद में उन्होंने कहा कि पूर्वी मिदनापुर के 15 ब्लॉक बाढ़ में डूबे हुए हैं और लोग बेघर हैं।
पश्चिमी मिदनापुर के जिलाधिकारी एन. एस. निगम ने बताया कि केलेघई और सुवर्णरेखा नदी में पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है।
उन्होंने बताया कि अभी तक दो लाख लोगों को बचाया गया है और उन्हें 822 राहत शिविरों में उन्हें शरण दी गई है।
रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर की मदद ये पूर्वी मिदनापुर के पताशपुर और पश्चिमी मिदनापुर के नारायणगढ़, सबांग और बेल्दा में 11 टन चावल गिराए गए।
राज्य के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता ने कहा कि अभी तक राहत कार्यो में 17 करोड़ रुपये राज्य सरकार की ओर से खर्च किए जा चुके हैं।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "बाढ़ के कारण रेल सेवाएं भी बाधित हुई हैं। बाढ़ के कारण हावड़ा-भद्रक रेल लाइन को नुकसान पहुंचा है। इसे ठीक करने में कम से कम 10 दिनों का समय लगेगा। लंबी दूरी की चार रेलगाड़ियों के रूट परिवर्तित कर दिए गए है।"
उड़ीसा में भी लगभग ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। नदियों के जल स्तर में कमी आई है और पिछले 24 घंटों के दौरान बारिश भी नहीं हुई है लेकिन राज्य के उत्तरी हिस्से के हजारों लोग अभी भी इस त्रासदी के शिकार बने हुए हैं।
यहां सुवर्णरेखा, बुधाबलांगा और बैतरणी नदी में जल स्तर हालांकि कम हुआ है लेकिन अभी भी इन नदियां में पानी खतरे के निशान से ऊपर है। बाढ़ के कारण उत्तरी उड़ीसा के दस लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। बालासोर जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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