कृषि पर संसद का विशेष सत्र बुलाए सरकार : भाजपा (लीड)
नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मांग की है कि कृषि व खाद्यान्न संकट के समाधान के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए।
संसदीय सौध में आज से यहां शुरू हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने देश के सभी राजनीतिक दलों से आह्वान किया कि वे सभी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर यह दबाव बनाए कि कृषि समस्या पर चर्चा करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए।
उन्होंने कहा कि सरकार कृषि और खाद्यान्न संकट के समाधान के लिए कम से कम 10 वर्ष की अपनी दीर्घकालिक योजना लेकर आए। इस पर संसद में चर्चा हो और इसके अंतिम निष्कर्ष को गांव, गरीब और किसान के लिए संसद का संकल्प माना जाए।
किसानों की कर्ज माफी के संदर्भ में संप्रग सरकार द्वारा दिए गए राहत पैकेज को आधी-अधूरी बताते हुए उन्होंने कृषि व्यवस्था के सुधार के लिए ठोस उपाय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की राहत घोषणाओं के बावजूद भी किसानों की आत्महत्या का सिलसिला अब तक नहीं रुका।
राजनाथ ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि किसान आत्महत्या के मामले कर्ज माफी के बाद भी बढ़ते गए। इसलिए कृषि की समस्या पर विचार गहराई और व्यापक आयामों पर किया जाना चाहिए। केवल तात्कालिक समाधानों से कोई राहत मिलने वाली नहीं है।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बजट भाषण को भ्रामक करार देते हुए राजनाथ ने कहा कि तीन महीने पहले केंद्र सरकार द्वारा पेश किया बजट ठोस यथार्थ पर आधारित न होकर पूरी तरह से राजनीतिक उदेश्यों की पूर्ति के लिए था। उन्होंने दावा किया कि वित्त मंत्री के बजट के बाद आम आदमी की समस्या और बढ़ी है।
चिदंबरम पर व्यंग्य कसते हुए उन्होंने कहा कि बजट के प्रभावों ने आम आदमी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि वित्त मंत्री ने यह कौन सी दवा दी है जिसे लेने पर मर्ज बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने कहा, "वित्त मंत्री ने आधुनिक मार्केटिंग मनोविज्ञान का शिकार हो गए, जिसकी पैकेजिंग और जिसका प्रोमोशन तो बहुत किया गया लेकिन प्रोडक्ट में दम नहीं था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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