खाद्य सुरक्षा पर दुनिया भर के नेता करेंगे चर्चा
रोम, 1 जून (आईएएनएस)। बढ़ती कीमतों की वजह से भुखमरी के कगार तक जा पहुंचे लाखों लोगों की सहायता के तरीकों पर चर्चा के लिये अगले सप्ताह रोम में 50 देशों के नेता एकत्र होने वाले हैं।
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार, इस शिखर बैठक का आयोजन संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने किया है। इसके आयोजन का उद्देश्य आपात सहायता के लिये दानकर्ताओं की प्रतिबद्धतायें जुटाना और खाद्य उत्पादन सुरक्षा के लिये दीर्घगामी रणनीतियां तैयार करना है। यह शिखर बैठक 3 से 5 जून तक चलेगी।
इसमें भाग लेने वाले प्रमुख नेताओं में मिस्र के राष्ट्रपति हुस्ने मुबारक, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनेशियो लुला डि सिल्वा, फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी, और जापान के प्रधानमंत्री यासूओ फुकुदा तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून शामिल हैं।
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और जैव-ऊ र्जा उत्पादन की वजह से गरीब देशों के समक्ष आयी खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों पर चर्चा होगी। पेट्रोलियम पदार्थो के महंगे होने या फिर उनसे होने वाले प्रदूषण की वजह से जैव ऊर्जा उत्पादन किया जा रहा है।
एफएओ के मुताबिक इस वर्ष विकासशील देशों द्वारा 16 करोड़ 90 लाख डॉलर का खाद्यान्न आयात क रने की संभावना है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 40 फीसदी ज्यादा है।
एफएओ के महानिदेशक जैक्स डियॉफ के मुताबिक, "विश्व के मौजूदा हालात हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य आपूर्ति और लोगों की जरूरत के बीच तालमेल बनाये रखने की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करते हैं खासतौर पर उस समय जबकि गरीबी उन्मूलन के बारे में पहले किये गये समझौतों पर अभी ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।"
एफएओ द्वारा रोम शिखर बैठक के लिये तैयार की गयी रिपोर्ट में 22 देशों को भुखमरी के कगार पर माना गया है। इसके अलावा 30 फीसदी से ज्यादा देशों को पूर्णतया पोषण उपलब्ध नहीं हो पाने वाला करार दिया गया है जो खाद्य और ईंधन दोनों ही विशुद्ध आयात करते हैं। इरिटिया, नाइजर, कामोरोस, हैती और लाइबेरिया विशेष तौर पर प्रभावित होने वाले देशों में से हैं।
रिपोर्ट में हालात से निपटने के लिये प्रत्यक्ष खाद्यान्न वितरण, खाद्यान्न सब्सिडी और गर्भवती महिलाओं तथा बुजुर्गो की सहायता के लिये उपायों जैसे पोषण संबंधी कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है।
इस समानान्तर शिखर बैठक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि औद्योगिक देश और कृषि के औद्योगिकीकरण की वजह से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है और धरती का तापमान बढ़ता है लेकिन किसानों, मछुआरों और ग्रामीण समुदायों पर सबसे पहले कहर बरपता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस












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