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इराक घोटाले पर सच्चाई उजागर करेगी मेरी पुस्तक : नटवर सिंह

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    नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह इराक के तेल के बदले अनाज घोटाले पर एक किताब लिख रहे हैं। इसी घोटले में नाम आने की वजह से उन्हें अपना पद गंवाना पड़ा था।

    नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह इराक के तेल के बदले अनाज घोटाले पर एक किताब लिख रहे हैं। इसी घोटले में नाम आने की वजह से उन्हें अपना पद गंवाना पड़ा था।

    किसी जमाने में कांग्रेस के नामचीन नेता रहे सिंह ने आईएएनएस को बताया, "अपनी किताब में मैं यह साबित कर दूंगा कि न तो मैंने और न ही मेरे पुत्र जगत सिंह ने इस तेल सौदे से एक पाई भी कमाई। इस सौदे से मुनाफा कमाने वाले सिर्फ जगत के दोस्त अंदलीब सहगल और आदित्य खन्ना थे।"

    सिंह ने कहा, "मैंने सिर्फ इतना ही किया था कि तीन सिफारिशी खत दिए थे। इसमें कौन सी बड़ी बात है? बहुत से लोग ऐसा करते हैं। "

    उन्होंने कहा कि इस मामले की तहकीकात पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि यह सौदा सिर्फ 40 लाख रुपये का था।

    उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने अमेरिका, स्विटजरलैंड, इराक और अन्य देशों की यात्रायें कीं और बेहतरीन होटलों में ठहरे, जबकि नतीजा कुछ नहीं निकला।

    उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 5 मई को सिंह के खिलाफ इस मामले की सुनवाई पर रोक लगा दी और प्रवर्तन निदेशालय से इस मामले में सिंह की संलिप्तता साबित करने को कहा।

    संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले की जांच के लिए अमेरिकी जांच अधिकारी पॉल वॉल्कर को नियुक्त किया था और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. एस. पाठक की अध्यक्षता में भारत सरकार ने एक जांच समिति गठित की। सिंह की किताब में पाठक की भूमिका का भी जिक्र किया जाएगा।

    यह पूछने पर कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा उनकी भूमिका पर संदेह किये जाने से क्या वह आहत हुए, सिंह ने कहा, "उन्होंने जल्दबाजी से काम लिया (उनसे दूरी बनाने और उनका इस्तीफा मांगने में)। वह ऐसा कैसे कह सकती हैं कि उनके मुझ से सिर्फ कामकाजी संबंध थे, जबकि मैं उनके परिवार के काफी करीब था?"

    राज्य सभा से इस्तीफा देने के बाद सिंह तीन किताबें लिख रहे हैं। उन्होंने बताया, " मेरी किताब यूअर्स सिन्सियरली अक्टूबर में आ जाएगी। यह पत्रों का संग्रह है, जो विभिन्न लोगों ने समय-समय पर मुझे लिखे हैं"। इसके अलावा उनकी एक अन्य किताब "डिप्लोमैटिक इंसीडेंट्स-1953-2005" फरवरी 2009 तक आ जाएगी।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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