वर्ष 2004 में भाजपा छोड़ना चाहते थे येदियुरप्पा
बंगलौर, 29 मई (आईएएनएस)। कर्नाटन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार में मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने वाले बी. एस. येदियुरप्पा वर्ष 2004 में विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में अपना भविष्य अंधकारमय देख रहे थे। साथ ही पार्टी छोड़ने का ख्याल भी उनके मन में लाने लगा था।
बंगलौर, 29 मई (आईएएनएस)। कर्नाटन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार में मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने वाले बी. एस. येदियुरप्पा वर्ष 2004 में विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में अपना भविष्य अंधकारमय देख रहे थे। साथ ही पार्टी छोड़ने का ख्याल भी उनके मन में लाने लगा था।
इस समय येदियुरप्पा राज्य में भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेता हैं। इनके नेतृत्व में पार्टी ने 225 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव में पूर्ण बहुमत के करीब पहुंच गई है।
हाल में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को कुल 110 सीटें मिली हैं जो पूर्ण बहुमत से तीन कम है जबकि वर्ष 2004 में हुए विधानसभा में पार्टी को वर्तमान समय से 31 सीटें कम मिली थीं।
उस समय येदियुरप्पा स्वयं को मुख्यमंत्री पद के उमीदवार घोषित नहीं किए जाने केपार्टी के फैसले से सहमत थे। वह उस समय बेहद निशान हो गए जब राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद मात्र 58 सीटें लेकर आई जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) कांग्रेस के साथ गठबंधन करने को प्रमुखता दे रही थी। उल्लेखनीय है कि उस समय कांग्रेस के पास कुल 65 सीटे थीं जबकि भाजपा को 79 सीटें प्राप्त हुई थी।
उस समय येदियुरप्पा का विचार था कि राज्य में पार्टी को दोबारा इतनी सीटें नहीं मिल सकती हैं और तत्कालिक घटनाक्रम में पार्टी छोड़ने की स्थिति बनी थी।
इसके बाद उन्होंने पार्टी में पुन: अपनी स्थिति मजबूत की और लोगों का विश्वास जीता, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications