'देश में 2005 में 15 लाख बाल मजदूर थे'
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। देश के संगठित-असंगठित क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयों में वर्ष 2005 के दौरान 4.18 करोड़ बाल मजदूर थे।
वर्ष 2005 के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश की 4.18 करोड़ इकाइयों में काम करने वाले 5.44 करोड़ कर्मियों में से 4.13 करोड़ पुरुष और 1.16 करोड़ महिलाएं थीं। इनमें से 15 लाख बाल मजदूर भी थे। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने गुरुवार को यह आंकड़े प्रस्तुत किए।
सर्वेक्षण के अनुसार 2005 के दौरान कृषि क्षेत्र के कुल 9 करोड़ कर्मचारियों में 18.9 लाख बच्चे थे। बाल मजदूरों की संख्या शहरी क्षेत्रों से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में थी।
वर्ष 2005 में 4.18 करोड़ इकाइयों में से 2.55 करोड़ इकाइयां ग्रामीण इलाकों में और 1.62 करोड़ इकाइयां शहरी इलाकों में थीं।
उल्लेखनीय है कि सन 1981 की जनगणना के अनुसार भारत में 10.3 लाख बाल मजदूर थे। 2001 में 5 से14 वर्ष की आयु के 10.2 लाख बाल मजदूर थे।
गौरतलब है कि भारतीय संविधान की 24, 39 और 45 धाराओं में 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा और मजदूरी कराने पर रोक का प्रावधान है।
इसके लिए देश के 250 जिलों में सरकार ने राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) की शुरुआत की है जिसके अंतर्गत बच्चों को मजदूरी से बचाने और विशेष विद्यालयों में भर्ती कराने का प्रावधान है। इससे पहले, सरकार ने जोखिम भरे स्थानों पर बाल मजदूरी रोकने के लिए 1987 में भी एक राष्ट्रीय नीति भी अपनाई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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