आर्कटिक में दबी मीथेन जलवायु बदलाव में अचानक ला सकती है तेजी
वाशिंगटन, 29 मई (आईएएनएस)। आर्कटिक के बर्फ के ढेरों में दबी 63 करोड़ 50 लाख वर्ष पुरानी मीथेन के अचानक फूट पड़ने से जलवायु बदलाव को पंख लग सकते हैं।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में किए गए इस शोध में पाया गया कि आर्कटिक में मीथेन मौजूद है। यह समुद्र के निचले स्तरों पर भी मौजूद है और इनके अचानक फूट पड़ने से दुनियाभर में गर्मी में वृद्धि हो सकती है।
मार्टिन कैनेडी के नेतृत्व में किए गए इस शोध में पाया गया है कि मीथेन के विस्थापन से गर्मी बढ़ रही है। इसी कारण पिछले हिम युग का अंत हुआ था।
कैनेडी के मुताबिक अध्ययन में पाया गया है कि अभी जलवायु बदलाव के लिए कार्बन डाईआक्साइड को सबसे ज्यादा जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, लेकिन मीथेन के कारण से गर्मी में अचानक वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने कहा कि निम्न दाब के क्षेत्रों में अगर एक बार मीथेन वायुमंडल में आने लगती है, तो यह गैस वहां पर तापमान बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पृथ्वी से अचानक मीथेन निकलने लगे।
गौरतलब है कि मीथेन रंगहीन और गंधहीन गैस है। ग्रीनहाउस गैस में इसकी क्षमता कार्बन डाइआक्साइड से 30 गुनी ज्यादा होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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