तेल व तिलहन उत्पादन में छह फीसदी वृद्धि की संभावना
नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। भारत में वर्ष 2008-09 के दौरान तिलहन का उत्पादन 6 फीसदी बढ़कर 3.6 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। वर्ष 2007-08 की तुलना में यह 20 लाख टन ज्यादा है।
अमेरिकी कृषि विभाग से जारी अटैची रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन और मूंगफली के उत्पादन में वृद्धि की संभावना से कुल तिलहन उत्पादन में तेजी के अनुमान को बल मिला है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विवेच्य अवधि के दौरान घरेलू कीमतों में तेजी की वजह से सोयाबीन और मूंगफली की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ सकता है। विवेच्य वर्ष के दौरान मानसून के सामान्य से बेहतर रहने के अनुमान से भी तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना को समर्थन मिला है। रिपोर्ट में हालांकि सरसों के रकबे को अन्य खरीफ फसलों से तगड़ी चुनौती मिलने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2008-09 के दौरान कुल 1.22 करोड़ टन खाद्य तेलों की खपत हो सकती है। वर्ष 2007-08 की तुलना में यह 3 फीसदी ज्यादा है। घरेलू उत्पादन व लोगों की आय में वृद्धि को खपत में वृद्धि के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
वहीं वर्ष 2007-08 के दौरान कुल 1.19 करोड़ टन खाद्य तेलों की घरेलू खपत का अनुमान लगाया गया है जिसमें आयातित खाद्य तेलों की हिस्सेदारी 43 फीसदी तक हो सकती है।
घरेलू खपत के मामले में पाम तेल को वर्ष 2007-08 के दौरान भी प्रथम स्थान मिला है। वर्ष 2007-08 के दौरान कुल 40 लाख टन पाम तेल, 23 लाख टन सोया तेल, 19 लाख टन सरसों तेल व 16 लाख टन मूंगफली तेल की खपत का अनुमान है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2008-09 के दौरान खाद्य तेलों का उत्पादन छह फीसदी बढ़कर 73 लाख टन तक पहुंच सकता है। तिलहन के उत्पादन में वृद्धि व पेराई में वृद्धि की संभावना से कुल खाद्य तेल उत्पादन में बढ़ोतरी के अनुमान को बल मिला है। वर्ष 2007-08 के दौरान कुल 69 लाख टन खाद्य तेल उत्पादन का अनुमान लगाया गया है जो वर्ष 2006-07 की तुलना में 4 लाख टन ज्यादा है।
उत्पादन के मामले में सरसों तेल को वर्ष 2007-08 के दौरान भी प्रथम स्थान मिलने की संभावना व्यक्त की गई है। वर्ष 2007-08 के दौरान कुल 18.6 लाख टन सरसों तेल, 16.3 लाख टन मूंगफली तेल, 14 लाख टन सोया तेल व 10 लाख टन काटन तेल के उत्पादन का अनुमान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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