बिहार में बदहाल है शेरशाह का मकबरा
पटना, 25 मई (आईएएनएस)। सासाराम में अफगानी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना 'शेरशाह का मकबरा' रखरखाव में बरती जा रही ढिलाई के कारण बदहाल हो गया है। इस ऐतिहासिक धरोहर को सुंदर बनाने वाले तालाब के भी समाप्त होने की आशंका व्यक्त की जाने लगी है।
सरकार ने हालांकि समय-समय पर इसके रखरखाव के लिए राशि अवश्य खर्च किए, परंतु वे नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं।
बताया जाता है कि 16 वीं सदी में 1130 फीट लंबे व 865 फीट चौड़े तालाब के बीच निर्मित इस मकबरे के रखरखाव की जिम्मेदारी पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की है। पुरातत्वविदों की माने तो, शहर के नालों के गंदे पानी व खेतों के उर्वरकयुक्त जल तालाब में गिरने से मकबरे की नींव अंदर में कट रही है।
रोहतास के श्री शंकर महाविद्यालय के वनस्पति विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अवधेश कुमार सिंह का कहना है कि तालाब का पानी पूरी तरह अम्लीय हो गया है, जो मकबरे की दीवार के लिए हानिकारक है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण सहायक नीरज कुमार सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष तालाब में नहर से पानी लाने व पानी निकासी की व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिये 12 लाख 31 हजार रुपये की राशि विमुक्त की गई थी। सिंह भी स्वीकारते हैं कि तालाब के एक तरफ शहर के लोगों द्वारा कूड़ा-कचरा फेंक दिया जाता है जिससे तालाब की गहराई कम होती जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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