कर्नाटक में खिला कमल, हाथ ने नहीं दिया कांग्रेस का साथ (लीड-2)
बंगलौर, 25 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। हालांकि उसे स्पष्ट बहुमत तो नहीं मिला है लेकिन वह बहुमत के बेहद करीब है। कुल 224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में भाजपा को 110 सीटों पर सफलता मिली है। कांग्रेस 80 सीटें पाने में सफल रही लेकिन इस चुनाव में जनता दल-सेक्युलर को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उसके खाते में महज 28 सीटें ही गईं।
चुनावी नतीजे पूरी तरह सामने आ जाने के बाद भाजपा बहुमत के लिए जरूरी 113 के जादुई आंकड़े से तीन सीट कम पर ही सिमट गई। बहरहाल, उसे भरोसा है कि वह निर्दलीय विधायकों के समर्थन से राज्य में अपनी सरकार बना लेगी। भाजपा सरकार बना लेती है तो यह पहला मौका होगा जब दक्षिण भारत के किसी राज्य में उसकी अपनी सरकार बनेगी।
भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदीयुरप्पा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। पार्टी ने चुनावों के पूर्व ही उनकी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी थी। भाजपा विधायक दल की सोमवार को बैठक बुलाई गई है जिसमें उन्हें पार्टी का नेता चुना जाएगा। भाजपा नेता इसके बाद राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
इस चुनाव में हालांकि कांग्रेस की सीटों और उसके वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है लेकिन 80 के आंकड़े से ऊपर नहीं पहुंच सकी। कांग्रेस ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले एस. एम. कृष्णा को महाराष्ट्र के राजभवन से कर्नाटक की गलियों व सड़कों पर उतारा लेकिन उसे इसका कोई फायदा नहीं मिला।
इस चुनाव में कांग्रेस के कई दिग्गजों को पटखनी खानी पड़ी है। चुनाव हारने वाले दिग्गज कांग्रेसियों में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री धरम सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.एच. अंबरीश, एच. के. पाटिल, एम. पी. प्रकाश जैसे नेता शामिल हैं। पार्टी के 36 विधायकों को हार का मुंह देखना पड़ा है।
कांग्रेस ने इस चुनाव में 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया जिसमें 5 ने जीत दर्ज की। जबकि 11 महिला उम्मीदवारों में से एक को भी जीत हासिल नहीं हो सकी।
चुनावी नतीजों ने पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) को पूरी तरह हाशिए पर ला दिया है। राज्य की राजनीति में किंग मेकर की भूमिका में बने रहने का सपना संजोए जेडी-एस को मात्र 28 सीटें ही मिलीं। पार्टी को 30 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। राज्य की जनता ने जेडी-एस को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में भाजपा को 79 सीटों पर विजय हासिल हुई थी। जबकि कांग्रेस को 65 और जेडी-एस को 58 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने पहले जेडी-एस के साथ मिलकर सरकार बनाई और फिर उसका गठबंधन उससे टूट गया। बाद में जेडी-एस ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई और 20-20 महीने के सत्ता की साझेदारी का फैसला हुआ। जेडी-एस की तरफ से एच. डी. कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने लेकिन जैसे ही भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी. एस. येदीयुरप्पा के मुख्यमंत्री बनने की बारी आई तो जेडी-एस ने अपने हाथ पीछे खींच लिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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