गुज्जर आंदोलन के कारण राजस्थान में तनाव बरकरार
जयपुर, 24 मई (आईएएनएस)। राजस्थान के भरतपुर जिले में अभी भी तनाव बना हुआ है। आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां रेल यातायात जाम कर रहे गुज्जर आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोलियां चलाई थीं, जिसमें 13 लोग मारे गए थे।
गुज्जर समुदाय ने आज राज्य के अजमेर, भीलवाड़ा, कोटा और झालावाड़ जिले में बंद का आह्वान किया है।
गुज्जरों का आंदोलन और भड़कने के कारण शुक्रवार की हिंसा के बाद बयाना में जिला प्रशासन की मदद के लिए सेना को बुला लिया गया है।
राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने शनिवार को कहा कि एक पुलिसकर्मी की गुज्जरों द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने और रेलमार्ग को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए पुलिस ने गोली चलाई। राज्य सरकार ने पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
कटारिया ने आईएएनएस को बताया,"हिंसा में एक पुलिसकर्मी सहित 13 लोगों के मरने की सूचना है। राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आज घटनास्थल का दौरा कर स्थिति पर विचार करेंगे।"
कटारिया ने कहा कि पुलिस ने हिंसक भीड़ पर काबू पाने के लिए पहले आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाईं। लेकिन इससे भी भीड़ के काबू में नहीं आने पर मजबूर होकर पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
हिंसा प्रभावित क्षेत्र में त्वरित कार्रवाई बल के 200, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 300 और सेना के 2,000 जवानों को तैनात किया गया है।
गुज्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रमुख के.एस बैंसला ने शुक्रवार को सैकड़ों समर्थकों के साथ बायाना के नजदीक डुमरिया स्टेशन पर रेलमार्ग जाम कर दिया था। रेल रोको आंदोलन का आह्वान गुज्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने किया था।
गौरतलब है कि अति पिछड़े वर्ग में शामिल गुज्जरों ने खुद को अनुसूचित जनजातीय वर्ग मे शामिल करने की मांग को लेकर पिछले वर्ष 29 मई से 4 जून तक आंदोलन किया था।
इस दौरान हुई हिंसा में करीब 26 लागों की मौत हुई थी। बैंसला ने कहा है कि इस बार आंदोलन उनकी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा "भारतीय जनता पार्टी की सरकार हमें लंबे समय से बेवकूफ बना रही है, लेकिन इस बार हमारी मांगे पूरी होनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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