राजीव की हत्या के 17 साल बाद रहस्य बरकरार
नई दिल्ली, 20 मई (आईएएनएस)। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के 17 वर्षो के बाद भी मामले की जांच में जुटी एजेंसी रहस्य को उजागर करने से कोषों दूर है।
नई दिल्ली, 20 मई (आईएएनएस)। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के 17 वर्षो के बाद भी मामले की जांच में जुटी एजेंसी रहस्य को उजागर करने से कोषों दूर है।
गांधी की हत्या 21 मई 1991 को तमिलनाडु में कर दी गई थी, जिसमें कथित तौर पर चंद्रास्वामी और श्रीलंकाई विद्रोही संगठन 'लिबरेशन टाइगर ऑफ तमिल ईलम' (लिट्टे) के नेताओं का हाथ माना जाता है। इसकी जांच के लिए वर्ष 1998 में बहु अनुशासनात्मक जांच एजेंसी (एमडीएमए) का भी गठन किया गया।
करीब दो दशक से मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रवक्ता जी. मोहंती ने कहा, "हमलोगों ने जांच प्रक्रिया में सहयोग प्राप्त करने के लिए कई देशों को कानूनी नोटिस भेजा है, जिनमें से कुछ देशों ने पत्र का जवाब दिया है।"
उन्होंने कहा कि एमडीएमए ने कुल 27 देशों को कानूनी नोटिस भेजा था जिसमें से अब तक छह देशों ने ही पत्र का जवाब दिया है। जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग नहीं मिलने के कारण ही अब तक हत्याकांड से जुड़े रहस्य का पर्दाफाश नहीं हो पाया है।
मोहंती ने कहा, "जिन देशों को नोटिस भेजा गया है, फिलहाल उनके द्वारा जांच किया जाना है। इस संबंध में उनके द्वारा रिपोर्ट भेजे जाने के बाद ही हमलोग आगे की कार्रवाई कर सकेंगे।"
नोटिस चंद्रास्वामी की 'बैंक ऑफ क्रेडिट एंड कॉमर्स इंटरनेशनल' से कथित संबंधों को स्थापित करता है। यह बैंक अब दीवालिया घोषित हो गया है। इसी बैंक में लिट्टे का वरिष्ठ सदस्य कुमारन पद्दमानाभन उफ केपी खाताओं का संचालन करता था।
विस्तृत जानकारी से इंकार करते हुए मोहंती ने कहा, "जांच प्रक्रिया गुप्त रूप से चल रही है और इसके संबंध में तत्काल अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती।"
उल्लेखनीय है कि एमडीएमए का गठन न्यायाधीश मिलाप चंद जैन द्वारा दिए गए सुझाव पर किया गया था। जैन समिति राजीव गांधी हत्याकांड की जांच के लिए वर्ष 1991 में गठित की गई थी, जिसने वर्ष 1998 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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