सुप्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर नहीं रहे (लीड-1)
पुणे, 19 मई (आईएएनएस)। देश के सार्वकालिक महान नाटककारों में से एक विजय तेंदुलकर अब नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद आज सुबह उनका निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार उनकी मौत के कुछ घंटों बाद ही स्थानीय वैकुंठ शवदाह गृह में संपन्न हो गया।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह सहित कई वरिष्ठ राजनेताओं, साहित्यकारों, रंगकर्मियों और कई फिल्मी हस्तियों ने तेंदुलकर के निधन पर शोक जताया है।
तेंदुलकर की पत्नी निर्मला और पुत्र राजा की 2001 में और उनकी अभिनेत्री पुत्री प्रिया की वर्ष 2002 में ही मौत हो गई थी।
तेंदुलकर लंबे समय से मधुमेह और मांसपेशियों की बीमारी 'मायेस्थीनिया ग्रेविस' से जूझ रहे थे। कल देर रात अचानक तबियत खराब होने पर उन्हें तुरंत प्रयाग अस्पताल ले जाया गया जहां आज सुबह करीब आठ बजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल के एक चिकित्सक शिरीष प्रयाग ने बताया, "वह पिछले डेढ़ साल से मायेस्थीनिया ग्रेविस से पीड़ित थे। पहली बार उन्हें पिछले नवंबर में अस्पताल में भर्ती कराया गया था और दिसंबर में उन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। इस अप्रैल में उन्हें दोबारा तबियत खराब होने पर फिर भर्ती कराया गया लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।"
उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने आए वरिष्ठ अभिनेता और निर्देशक अमोल पालेकर ने आईएएनस से कहा, "मराठी सिने जगत को उनकी कमी बहुत खलेगी। उन्हें उनके योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा।"
तेंदुलकर का जन्म छह जनवरी सन 1928 को हुआ था। विजय ने 12 वर्ष की उम्र में ही अपने पहले नाटक का सृजन किया। सन 1942 में 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया।
बाद के वर्षो में उन्होंने लगातार समाचार पत्रों के लिए लेख लिखे। उनके दूसरे नाटक 'श्रीमंत' ने उन्हें प्रतिष्ठित किया। श्रीमंत एक अविवाहित युवती की कथा है जो अपने अवैध शिशु को पैदा करने का निश्चय करती है और उसका पिता अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए उसके लिए एक पति को खरीदने का प्रयास करता है।
पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित इस प्रसिद्ध साहित्यकार रंगकर्मी ने 'घासीराम कोतवाल', 'सखाराम बाइंडर' , 'खामोश अदालत जारी है' जैसे बेहतरीन नाटकों का सृजन किया। इसके अलावा उन्होंने 'मंथन', 'निशांत', 'आक्रोश' और 'अर्धसत्य' जैसी चर्चित फिल्मों की पटकथा भी लिखी। इन सभी को आलोचकों द्वारा बहुत सराहा गया। 'मंथन' के लिए तो उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिया गया।
उन्होंने अपने जीवनकाल में कुल 27 नाटकों और 25 एकल नाटकों की रचना के अलावा 12 उपन्यासों का अनुवाद, बच्चों के लिए 16 नाटक और एक आत्मकथा भी लिखी। इसके अलावा भी उनका रचना संसार खासा समृद्ध है।
तेंदुलकर को 'संगीत नाटक अकादमी सम्मान' और जीवन भर की उपलब्धियों के लिए 'संगीत नाटक अकादमी की फैलोशिप' प्रदान की गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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