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महाराष्ट्र के यवतमाल का एक किसान गुनगुना रहा है खुशहाली के तराने

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    पंधरकावड़ा (महाराष्ट्र), 19 मई (आईएएनएस)। सुनने में यह बात जरूर अविश्वसनीय लगती है लेकिन है यह सच। किसानों की आत्महत्या के लिए कुख्यात महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का एक किसान सफलता की अनूठी गाथा रच रहा है।

    पंधरकावड़ा (महाराष्ट्र), 19 मई (आईएएनएस)। सुनने में यह बात जरूर अविश्वसनीय लगती है लेकिन है यह सच। किसानों की आत्महत्या के लिए कुख्यात महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का एक किसान सफलता की अनूठी गाथा रच रहा है।

    तीन एकड़ जमीन का मालिक पुरुषोत्तम कहता है, "मैंने कभी कोई कर्ज नहीं लिया।"

    वह 10 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती करता है। उसका कहना है कि इलाके के कई और किसान भी उसी की तरह खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि पुरुषोत्तम महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके के यवतमाल जिले का निवासी है जहां किसानों की आत्महत्या के सिलसिले को रोकने और उनकी समस्याओं के हल के लिए सरकार पिछले तीन सालों में 10 अरब रुपये का राहत पैकेज दे चुकी है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने भी क्षेत्र के लिए लगभग 40 अरब रुपये का एक पैकेज दिया और इस साल लगभग 600 अरब रुपये के कर्ज माफ किए गए हैं।

    पुरुषोत्तम अपने खेतों में इस साल 15 क्विं टल सोयाबीन और दो क्विं टल अरहर का उत्पादन कर चुका है। अब उसका गेंहू के साथ-साथ सब्जियां उगाकर कुछ अधिक कमाई करने का इरादा है।

    पुरुषोत्तम न केवल खुद अपने खेतों पर काम करता है वरन उसने चार पुरुष और दो महिला श्रमिकों को रोजगार पर भी रखा हुआ है। उसने आईएएनएस से कहा, "मैं महिला श्रमिकों को रोजाना छह घंटों के लिए 50 रुपये पारिश्रमिक देता हूं और पुरुष श्रमिकों में से प्रत्येक को मैंने 25 हजार रुपये सालान के ठेके पर रखा है।"

    यह पूछे जाने पर कि क्या उसने अपने इलाके में सैकड़ों किसानों की आत्महत्या की बात सुनी है? पुरुषोत्तम कहता है, "मैंने कुछ किसानों की आत्महत्या की बात सुनी है। वे शायद अपने खेतों की ठीक देखभाल नहीं कर पाए होंगे या शायद वे मानसिक रूप से कुछ कमजोर रहे हों।"

    गौरतलब है कि पुरुषोत्तम के घर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर विदर्भ जन आंदोलन समिति (वीजेएएस) के नेता किशोर तिवारी का घर है। पिछले तीन सालों के दौरान हुई किसानों की आत्महत्याओं पर लगातार काम कर रहे तिवारी जहां अपनी जनहित याचिकाओं और किसान रैलियों की मदद से दिल्ली और महाराष्ट्र की सरकारों पर लगातार दबाव बनाए रखते हैं वहीं पुरुषोत्तम ने कभी उनका नाम भी नहीं सुना।

    निश्चित रूप से पुरुषोत्तम अपने इलाके के कर्ज में डूबे हजारों किसानों के लिए एक अपवाद है लेकिन वह खराब फसल, ऊंची ब्याज दरों के कारण बढ़ते कर्ज का सामना कर रहे लोगों के लिए एक उदाहरण भी है कि कैसे योजनाबद्ध जीवनशैली मनुष्य की समस्याओं का खुद ब खुद निराकरण कर देती है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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