वायदा पर रोक कीमतों पर नहीं डाल पाया असर

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। चार जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध की घोषणा का कीमतों पर बामुश्किल असर दिखाई दे रहा है। उल्टे मांग की तुलना में कम आपूर्ति ने कीमतों में और तेजी ला दी है।

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। चार जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध की घोषणा का कीमतों पर बामुश्किल असर दिखाई दे रहा है। उल्टे मांग की तुलना में कम आपूर्ति ने कीमतों में और तेजी ला दी है।

इससे पूर्व सरकार के निर्देश पर वायदा बाजार की नियामक संस्था फारवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) ने 8 मई से सोया तेल, रबर, चना व आलू के वायदा पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।

बाजार से संबंधित सूत्रों के अनुसार प्रतिबंध की घोषणा के बाद से कमी के बजाए सोया तेल और रबर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है जबकि चना व आलू की कीमत कमोबेश स्थिर रही है।

इंदौर स्थित कारोबारी के अनुसार मध्यप्रदेश में सोया तेल की कीमतों में प्रतिबंध के बाद से 4 फीसदी का इजाफा हुआ है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी सोया तेल की कीमतों में बढ़त के लिए जिम्मेदार रहा है।

न्यूयार्क मर्के टाइल एक्सचेंज (नाइमेक्स) के इलेक्ट्रानिक ट्रेडिंग में सप्ताहांत कारोबार के दौरान तेल 127.82 डालर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया।

कमोडिटी विशेषज्ञ मीनाक्षी शर्मा के अनुसार वायदा पर प्रतिबंध के बाद जिंसों की कीमत खुदरा बाजार में घटने के बजाए बढ़ी है। जिन जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी कीमतों में वृद्धि के लिए वायदा नहीं बल्कि वैश्विक कीमतों में तेजी जिम्मेदार रही है। खाद्य तेलों की कीमत के मामले में देखिए घरेलू कीमत पूरी तरह से बुरसा मलेशियन डेरीवेटिव्स (बीएमडी) व शिकागो बोर्ड आफ ट्रेड (सीबोट) पर निर्भर करता है।

शर्मा के अनुसार जिस जिंस की कुल घरेलू खपत का 50 फीसदी आयात किया जाता हो उसकी कीमतों में तेजी के लिए वायदा को कटघरे में खड़ा करना कतई तर्कसंगत नहीं है।

रबर की कीमतों के संदर्भ में भी वायदा कारोबार पर प्रतिबंध असर नहीं डाल पाया है। तभी तो तेल की शह पर कोच्चि में शुक्रवार को इसकी कीमत 121 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

रबर बोर्ड से जुड़े अधिकारी के अनुसार रबर की कीमतों में तेजी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, वैश्विक कीमत व घरेलू आपूर्ति उत्तरदायी हैं। जहां तक आलू और चना का प्रश्न है, आलू की कीमतों में प्रतिबंध के पहले से ही कीमतों में गिरावट जारी है। पिछले 2 महीनों में इसकी कीमतों में तकरीबन 30 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है वहीं चना की कीमत देश के विभिन्न हाजिर बाजारों में कमोबेश स्थिर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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