जयपुर में अस्पताल बयां कर रहा हैं त्रासदी की भयावहता
जयपुर, 18 मई (आईएएनएस)। जयपुर में आतंकवादी विस्फोट को भले ही मुश्किल से सप्ताहभर ही हुआ हो लेकिन इस विस्फोट से उबरने में लोगों को लंबा समय लगेगा। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में इन दिनों दिल दहला देने वाला मंजर दिखाई दे रहा है।
जयपुर, 18 मई (आईएएनएस)। जयपुर में आतंकवादी विस्फोट को भले ही मुश्किल से सप्ताहभर ही हुआ हो लेकिन इस विस्फोट से उबरने में लोगों को लंबा समय लगेगा। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में इन दिनों दिल दहला देने वाला मंजर दिखाई दे रहा है।
पिछले मंगलवार को जयपुर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में लगभग 70 लोग मारे गए थे और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। घायलों में एक 32 वर्षीय अनिल वासवानी की बायीं किडनी क्षतिग्रस्त हो गई थी जिसे डाक्टरों ने निकाल दिया है। इस असहनीय दर्द ने उसे रोने पर मजबूर कर दिया है।
अस्पताल में जैसे कोई बुरा सपना देख रहा अनिल हर आधे घंटे पर कंपकंपाते हुए उठता है और फिर परेशान सो जाता है। अनिल अपनी मां का बड़ा बेटा है। अनिल की मां सावित्री देवी बेटे के चेहरे के आंसू तो पोछती है लेकिन खुद के आंसूओं को नहीं रोक पाती। वह बेटे के बगल में बैठी उसके भविष्य को लेकर बुरी तरह चिंताग्रस्त हैं।
55 वर्षीय सावित्री ने आईएएनएस से बताया, "वह हर आधे घंटे में उठ जाता है और रोने लगता है। जैसे ही उसके दिमाग में विस्फोट का दृश्य उभरता है वह परेशान हो जाता है।"
वासवानी जैसे बहुत से घायल इस अस्पताल में विस्फोट की दर्दनाक कहानियां बयां कर रहे हैं, लेकिन उनकी सही तरह से देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों की अधिकता हो गई है लेकिन मरीजों के वार्ड में साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। कई जगह खून के धब्बे, बैंडेज की पट्टियां, बिस्कुट के खाली पैकेट और केले के छिलके बिखरे पड़े हुए हैं। अस्पताल में विस्फोट में घायल हुए मरीजों के लिए अलग से परामर्श की कोई व्यवस्था भी नहीं है।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक नरपत सिंह शेखावत ने बताया, "मरीजों को चिकित्सकीय सलाह पर हम उनसे मिलते हैं, लेकिन यहां उनके लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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