6.2 प्रतिशत के विकास के बावजूद कृषि उद्योग काफी पीछे
नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। भारत ने कृषि उद्योग क्षेत्र में पिछले दस वर्षो में औसतन 6.2 फीसदी की दर से वृद्धि की है। इसके बावजूद विकासशील देशों के कृषि उत्पादों में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 1995 के 3.1 प्रतिशत से मामूल बढ़कर 2005 में 3.8 फीसदी हुई।
नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। भारत ने कृषि उद्योग क्षेत्र में पिछले दस वर्षो में औसतन 6.2 फीसदी की दर से वृद्धि की है। इसके बावजूद विकासशील देशों के कृषि उत्पादों में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 1995 के 3.1 प्रतिशत से मामूल बढ़कर 2005 में 3.8 फीसदी हुई।
विकासशील देशों में भारत की स्थिति बेहद खराब है वहीं पड़ोसी देश चीन की हिस्सेदारी 26.5 प्रतिशत है। संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) के 'इंटरनेशनल ईयरबुक ऑफ इंडस्ट्रीयल स्टेटिस्टीक्स 2007' में यह खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1995-2005 के दस वर्षो की अवधि के दौरान मलेशिया और भारत का कृषि उद्योग क्रमश: औसतन 8 और 6.2 फीसदी की दर से विकास किया।
यूएनआईडीओ की रिपोर्ट के अनुसार कुल विनिर्माण रोजगार में कृषि उद्योग संबंधी रोजगार का प्रतिशत मात्र 1.2 प्रतिशत है, जबकि फिलीपींस में यह 9.5 प्रतिशत, मलेशिया में 8.8 प्रतिशत और चीन में 7.65 प्रतिशत है।
इस बारे में भारतीय किसान संघ के महासचिव पी. चेंगाल रेड्डी ने कहा, "भारत में कृषि उद्योग के विकास के लिए काफी संभावनाएं हैं। कई देशों में इस क्षेत्र में काफी कार्य हो रहे हैं। देश में किसानों के साथ सही तालमेल और कृषि उत्पादों के निर्माण संबंधी कदम उठाकर इस क्षेत्र में आगे बढ़ा जा सकता है।"
ऐसा माना जा रहा है कि खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग दस अरब रुपये के निवेश से कृषि क्षेत्र में 54 हजार लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर इतनी ही राशि के निवेश से कपड़ा उद्योग में 45 हजार और पेपर उद्योग में 25 हजार लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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