विदेश नीति की स्वतंत्रता की कसौटी गैस पाईपलाइन : वाम

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लेकर सरकार के साथ अगले हफ्ते होने वाली बैठक से पहले वाम दलों ने कहा है कि ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाईपलाइन का भविष्य ही यह साबित कर देगा कि वर्तमान में भारतीय विदेश नीति कितनी स्वतंत्र है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव ए.बी.वर्धन ने आईएएनएस से कहा, "यदि पाईपलाइन समझौता आगे बढ़ता है तो हम समझेंगे कि हमारी विदेश नीति स्वतंत्र है। "

अमेरिका द्वारा पाईपलाइन परियोजना का विरोध करने पर टिप्पणी करते हुए बर्धन ने कहा "यदि पाईपलाइन समझौता आगे नहीं बढ़ता है तो इसका मतलब होगा कि अमेरिकी दबाव की जीत हुई है। "

अमेरिका को संदेह है कि यदि पाईपलाइन परियोजना सफल हो गई तो भारत और ईरान नजदीक आ जाएंगे। इससे ईरान के संदेहास्पद परमाणु हथियार कार्यक्रम पर अलग-थलग करने की अमेरिकी योजना पर पानी फिर सकता है।

गौरतलब है कि वाम दल पहले भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर स्वतंत्र विदेश नीति से समझौता करने का आरोप लगा चुके हैं। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में ईरान के खिलाफ दो बार 2005 और 2006 में वोट दिया था।

बर्धन ने इस बात की पुष्टि की कि सरकार ने भाकपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्‍सवादी (माकपा), फारवर्ड ब्लाक और रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) को अगले हफ्ते बैठक के लिए आमंत्रित किया है।

पिछले वर्ष परमाणु करार पर मतभेदों को दूर करने के लिए विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में पैनल का गठन किया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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