गुंटूर की आग से लाल मिर्च और तीखी होगी
नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। लाल मिर्च की सबसे बड़ी मंडी गुंटूर में आग लगने से इसकी कीमतों में भारी तेजी की संभावना बन रही है। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार आग लगने से लाल मिर्च की हाजिर व वायदा कीमतों में 300 से 400 रुपये प्रति 100 किलो तक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। लाल मिर्च की सबसे बड़ी मंडी गुंटूर में आग लगने से इसकी कीमतों में भारी तेजी की संभावना बन रही है। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार आग लगने से लाल मिर्च की हाजिर व वायदा कीमतों में 300 से 400 रुपये प्रति 100 किलो तक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में लाल मिर्च के गोदामों में शनिवार की सुबह आग लगने से तकरीबन 5 लाख लाल मिर्च की बोरियों के जलने की आशंका व्यक्त की जा रही है। पांच से सात शीतगृहों के भी आग के चपेट में आने की खबर है।
प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार एशिया की सबसे बड़ी लाल मिर्च की गुंटूर मंडी में शार्ट-सर्किट की वजह से लगी आग में तकरीबन 5 अरब रुपये के नुकसान की संभावना है। कारोबारियों के मुताबिक शनिवार सुबह 57 एकड़ क्षेत्र में फैले लाल मिर्च की मंडी में देखते ही देखते तकरीबन 500 से लेकर 600 निजी गोदाम जलकर राख हो गए।
एग्री कमोडिटी विशेषज्ञ मीनाक्षी शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि सटोरिये इस मौके का फायदा उठाने में जुट गए हैं। इस बाबत बाजार में नुकसान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। शर्मा के अनुसार नुकसान के बारे में ठीक-ठीक बताना इसलिए भी मुश्किल है कि आग में जलने वाले तमाम गोदाम निजी मालिकों के हैं और ये कारोबारियों व सटोरियों के दबाव में नुकसान के बारे में ठीक- ठीक नहीं बता रहे हैं।
मीनाक्षी ने बताया कि अल्पावधि के लिए हाजिर सहित वायदा बाजार में लाल मिर्च की कीमतों में 300 से 400 रुपये प्रति 100 किलो तक की भारी बढ़त देखने को मिल सकती है। आग लगने से गुंटूर में शनिवार को हाजिर कारोबार ठप रहा। इससे पूर्व 2 मई को गुंटूर में हाजिर लाल मिर्च 25 रुपये गिरकर 4,227 रुपये प्रति 100 किलो बिका था।
मीनाक्षी बताती है कि मार्च में हुई बारिश की वजह से एक तो ऐसे ही उत्पादन में कमी के प्रबल आसार हैं, वहीं आग लगने की घटना के मद्देनजर आने वाले दिनों में आपूर्ति के और प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। कारोबारियों के अनुसार एनसीडीईएक्स के गोदामों में पहले से ही लाल मिर्च के कम स्टाक हैं।
आवक में फिलहाल तेजी दर्ज की जा रही है। 15 दिन पहले की तुलना में औसतन दैनिक आवक 50 हजार बोरी से बढ़कर 60 हजार तक पहुंच गई है। लेकिन ज्यादातर आवक फटकी यानी निम्न गुणवत्ता के लाल मिर्च की है। मीनाक्षी के अनुसार मार्च में हुई बारिश से लाल मिर्च की फसल को व्यापक नुकसान हुआ और उच्च गुणवत्ता की जगह फटकी लाल मिर्च की बहुतायत हो गई।
अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि गोदामों में आग, उच्च गुणवत्ता के लाल मिर्च की कमी और भारी निर्यात मांग की वजह से आने वाले दिनों में कीमतों में चांदी रहेगी। फिलहाल पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया व भारतीय लाल मिर्च के अन्य पारंपरिक खरीददार देशों से मांग काफी निकल रही है।
मीनाक्षी बताती है कि उच्च गुणवत्ता के लाल मिर्च की बढ़ती विदेशी मांग से इसकी कीमतों में तो तेजी रहेगी लेकिन फटकी यानी निम्न श्रेणी के लाल मिर्च की नहीं के बराबार विदेशी और घरेलू मांग की वजह से इसकी कीमतों में नरमी दर्ज की जा सकती है। एनसीडीईएक्स में सप्ताहांत लाल मिर्च का जून वायदा 190 रुपये चढ़कर 4,918 रुपये के ऊपरी सर्किट पर बंद हुआ। एनसीडीईएक्स के गोदामों में 30 अप्रैल को लाल मिर्च का डिमैट स्टाक 734 टन था और प्रोसेस में 90 टन लाल मिर्च थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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