अपनी ही बोली में पढ़ेंगे जनजातियों के बच्चे
भोपाल, 4 मई (आईएएनएस)। कई बार भाषा संप्रेषण में बाधक बन जाती है। बच्चों को पढ़ाने के मामले में यह कठिनाई और गहरी हो जाती है। बच्चे अपनी बोली में चीजों को बेहतर समझते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को उन्हीं की बोली में शिक्षा देने का फैसला किया है।
खास तौर पर भारिया, बैगा और सहरिया जनजाति के बच्चों के लिए 'संरक्षण सह विकास' योजना बनाई गई है। इसके तहत जनजातियों के बच्चों को उन्हीं की बोली में शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए सरकार ने संविदा शाला शिक्षक वर्ग तीन के 259 अस्थाई पदों का सृजन किया है।
जनजाती समुदाय के बच्चों को पढ़ाने वाले दूसरे समुदाय के शिक्षक उनकी बोली की जानकारी नहीं रखते। उधर बच्चे हिंदी नहीं समझते। इसी स्थिति से निबटने के लिए यह पहल की गई है।
शिक्षकों की नियुक्ति में वही आवेदक लाभान्वित होंगे जो संबंधित ग्राम पंचायत के निवासी होने के साथ साथ उसी समुदाय संबंध रखते हों। इसमें उन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी जो जनजातियों की बोली के जानकार होंगे। नियुक्ति की प्रक्रिया में महिलाओं को अतिरिक्त प्राथमिकता मिलेगी।
संविदा आधार पर होने वाली इस नियुक्ति में सेवा वृद्घि का आधार शिक्षकों का कार्य मूल्यांकन होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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